Wednesday, March 11, 2026
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अब दो से ज्यादा बच्चों वाले बन सकेंगे मेयर-पार्षद, राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित

Rajasthan विधानसभा में राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 पारित हो गया। नगरीय विकास मंत्री Jhabar Singh Kharra ने बताया कि अब दो से अधिक संतान वाले लोग भी नगर निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। साथ ही संशोधन के तहत कुष्ठ रोग को खतरनाक रोगों की सूची से हटाकर भेदभाव खत्म करने का निर्णय लिया गया है।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया। संशोधन विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि दो से अधिक संतानों वाले प्रत्याशी अब नगर निकायों के चुनावों में भाग ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि नियंत्रित जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए पूर्व में दो से अधिक संतान वाले व्यक्तिओं को नगर निकाय चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया था। आमजन में बढ़ी सजगता के कारण बदले परिदृश्य में यह नियम अब अप्रासंगिक है। लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप इसे संशोधित करने का निर्णय लिया गया है। इससे अनुभवी लोगों को नगर निकायों से लोकतांत्रिक रूप से चुन के आने का अधिकार मिल सकेगा।

झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि साथ में ही संशोधन के अंतर्गत राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 में परिभाषित खतरनाक रोग की सूची से कुष्ठ रोग को बाहर कर दिया गया है ताकि कुष्ठ प्रभावित या उपचारित व्यक्तियों के साथ कोई भेदभाव ना हो। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश की पालना में यह निर्णय लिया गया है।

OBC जनसंख्या का स्पष्ट आंकड़ा ना होने के कारण निकाय चुनाव में देरी

मंत्री खर्रा ने कहा कि विभिन्न प्रदेशों के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोगों द्वारा अन्य पिछड़ी जातियों को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए रिट याचिकाएं दायर की गई थी। याचिकाओं पर निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अधिकृत आंकड़े राज्य सरकार को प्रस्तुत करने होंगे। यह आंकड़े राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किए जाने के उपरांत अन्य पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक आरक्षण दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण नगर निकाय चुनाव में विलंब हो रहा है। राज्य सरकार की मंशा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक आरक्षण देकर नगर निकायों में उनका उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

नगर निकायों में तय मापदंडों के अनुसार हो रहा परिसीमन

नगरीय विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार तय मापदंडों के अनुसार नगर निकायों का उचित परिसीमन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि 309 में से 234 नगर निकायों में मापदंडों के अनुसार ही परिसीमन किया गया है। शेष निकायों में भी न्यूनतम विचलन आया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 10 के तहत राज्य सरकार को सीमांकन का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि तीन नगरीय निकायों में चार रिट याचिकाएं दायर की गई थी इस सम्बंध में हाल ही में उच्च न्यायलय की खंडपीठ अपने निर्णय में वार्डों के पुनर्गठन को उचित ठहराया है। चर्चा के दौरान खर्रा ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतिम आंकड़े आने में चार से छह महीने लगेंगे। अतः उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही वर्तमान मतदाता सूची तैयार की गई है।

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Premanshu Chaturvedi
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