Tuesday, January 20, 2026
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Mehbooba Mufti on Kashmiri Pandits : महबूबा मुफ्ती बोली- कश्मीरी पंडितों के बिना घाटी अधूरी है, लोग उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है और घाटी के लोग उनकी सम्मानजनक वापसी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने पंडित समुदाय के लिए विधानसभा की दो सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया। मुफ्ती ने कहा कि पंडितों को चुनाव लड़ने दिया जाए ताकि आपसी विश्वास और एकता मजबूत हो सके। पीडीपी का एजेंडा संवाद और विकास के जरिए जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करना है।

Mehbooba Mufti statement on Kashmiri Pandits : जम्मू। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने मंगलवार को कहा कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है और घाटी के लोग बेसब्री से उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि कश्मीरी पंडितों के लिए विधानसभा की दो सीटें आरक्षित करना बेहतर होगा। महबूबा ने गांधी नगर स्थित पीडीपी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कश्मीरी पंडितों को अपना फैसला खुद लेना होगा। हम उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनके बिना घाटी अधूरी है।

कश्मीरी पंडितों की वापसी पर महबूबा मुफ्ती का बयान

वह कश्मीरी पंडितों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रही थीं जिनके घाटी से पलायन के 36 साल 19 जनवरी को पूरे हो गए और अपनी वापसी व पुनर्वास के लिए पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पीडीपी प्रमुख ने कहा कि उन्होंने हाल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) से मुलाकात की और उन्हें बताया कि विधानसभा में समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत करने के बजाय वे सीटें उनके लिए आरक्षित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें आने दीजिए, चुनाव लड़ने दीजिए। वे वोट मांगेंगे और मुसलमान उन्हें वोट देंगे। इसी तरह समुदाय एकजुट होंगे। उन्होंने कहा, वे हमारे भाई हैं, और हम चाहते हैं कि वे सम्मान के साथ लौटें और हमारे साथ मिलकर रहें ताकि कश्मीर पूर्ण हो सके।

मुफ्ती ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का एकमात्र एजेंडा संवाद और विकास के माध्यम से जम्मू कश्मीर में शांति और समृद्धि की बहाली और इसके क्षेत्रों की एकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पीर पंजाल और चिनाब घाटी को संभागीय दर्जा देने के उनके प्रस्ताव को डिक्सन योजना से जोड़ने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह से प्रशासनिक है और इसका उद्देश्य ‘‘उपेक्षित’’ क्षेत्रों का संतुलित विकास और बेहतर शासन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, पीडीपी का केवल एक ही एजेंडा है — जम्मू कश्मीर में गरिमा और सम्मान के साथ शांति बहाल करना। आपसी संवाद होना चाहिए, जैसा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में (पीडीपी संस्थापक) मुफ्ती मोहम्मद सईद ने दिखाया था, जब जम्मू कश्मीर के भीतर और पाकिस्तान के साथ भी संवाद किया गया था।

हम पीर पंजाल और चिनाब घाटी का कश्मीर में विलय नहीं करना चाहते : मुफ्ती

पीर पंजाल (राजौरी और पुंछ) तथा चिनाब घाटी (रामबन, डोडा और किश्तवाड़) को संभागीय दर्जा देने के उनके प्रस्ताव को नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा ‘डिक्सन’ योजना से जोड़े जाने पर मुफ्ती ने कहा कि वह उनका सम्मान करती हैं और उन्हें जम्मू कश्मीर का सबसे बड़ा नेता मानती हैं, लेकिन ‘‘मुझे लगता है कि वह भूल गए हैं कि उनके पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को इसी फॉर्मूले के लिए गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘यह नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके संस्थापक का एजेंडा हो सकता है, जिसके लिए उन्हें बर्खास्त किया गया और जेल भेजा गया। यह कभी भी हमारी पार्टी का एजेंडा नहीं हो सकता। ‘डिक्सन’ योजना एक ऐसा फार्मूला था जिसे सितंबर 1950 में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधान न्यायाधीश सर ओवेन डिक्सन ने प्रस्तावित किया था, जिसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू कश्मीर मुद्दे का समाधान करना था।

महबूबा ने भाजपा पर आरोप लगाया, उन्होंने लद्दाख को (2019 में) अलग करके महाराजा के पूर्ववर्ती राज्य को पहले ही नष्ट कर दिया है और जम्मू के लिए अलग राज्य की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम पीर पंजाल और चिनाब घाटी का कश्मीर में विलय नहीं करना चाहते, बल्कि जनता के हित में इन दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग संभाग का दर्जा चाहते हैं। भाजपा ने डिक्सन योजना को उस वक्त लागू करना शुरू किया जब उन्होंने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग संसदीय क्षेत्र की सीमाओं को फिर से निर्धारित करते हुए उसमें पुंछ और राजौरी को शामिल कर लिया।

Mukesh Kumar
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