Karnataka : नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के भाजपा विधायक बी.ए. बसवराज द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने हत्या के मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘आप एक जन प्रतिनिधि है। आपको साहस के साथ आगे बढ़कर यह कहना चाहिए कि मैं किसी भी तरह की पूछताछ का सामना करने के लिए तैयार हूं।’’ प्रधान न्यायाधीश के साथ पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। बसवराज को 15 जुलाई, 2025 को शिवप्रकाश उर्फ बिकला शिव की हत्या के मामले में बतौर आरोपी नामजद किया गया है।
जांच का सामना करें जन प्रतिनिधि : सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय द्वारा याचिका पर सुनवाई करने को लेकर अनिच्छा जताए जाने के बाद बसवराज की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने याचिकाकर्ता को नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। पीठ ने कहा, ‘‘हम संबंधित न्यायालय से नियमित जमानत के आवेदन पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध करते हैं।’’ रोहतगी ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि याचिकाकर्ता का हत्या से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मामला संपत्ति का विवाद था और ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि बसवराज का इससे कोई संबंध था।

प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘भूमि हड़पने वालों को आमतौर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होता है।’’ पीठ ने कहा कि हत्या के मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते समय अदालत को ‘‘बहुत सतर्क’’ रहना चाहिए। कुछ आरोपों का जिक्र करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ये जांच के विषय हैं। उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को पारित आदेश में कहा था, ‘‘यह देखते हुए कि अग्रिम जमानत देना एक असाधारण राहत है जिसे बढ़ाया जा सकता है। अदालत की राय है कि याचिकाकर्ता की राजनीतिक रसूख और मृतक की मां का उसके निर्वाचन क्षेत्र में रहने के तथ्य के मद्देनजर, निष्पक्ष जांच में बाधा आने की आशंका है और यह भी अग्रिम जमानत से इनकार करने का एक कारण हो सकता है।’’




