Saturday, January 10, 2026
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‘हग हग न रहा’: व्यापार समझौते पर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बयान के बाद कांग्रेस का मोदी पर तंज

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के इस बयान पर कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं करने से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता नहीं हो सका, कांग्रेस ने तंज कसा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने फिल्मी गीतों के जरिए कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी-ट्रंप की करीबी अब खत्म हो गई है और दोस्ती पहले जैसी नहीं रही।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं करने की वजह से भारत के साथ व्यापार समझौता नहीं हो पाने संबंधी अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर फिल्मी अंदाज में कटाक्ष किया। लुटनिक की टिप्पणियों का एक वीडियो पोस्ट करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘हग हग (आलिंगन आलिंगन) ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा।’’ मोदी पर निशाना साधते हुए फिल्मी अंदाज में रमेश ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘क्या से क्या हो गया, बेवफा तेरी दोस्ती में।’’

कांग्रेस का मोदी सरकार पर तंज

रमेश का एक तंज जहां देव आनंद अभिनीत फिल्म ‘गाइड’ (1965) के इसी तरह के बोल वाले हिट गाने पर आधारित था, वहीं अन्य तंज राज कपूर की 1964 की फिल्म ‘संगम’ के गीत ‘‘दोस्त दोस्त ना रहा’’ पर आधारित था। कांग्रेस महासचिव रमेश ने यह कटाक्ष तब किया जब लुटनिक ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया था। लुटनिक ने बृहस्पतिवार को ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में इसे बारे में विस्तार से बात की कि आखिर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब तक क्यों नहीं हो पाया है?

लुटनिक ने कहा, ‘‘मैं आपको भारत के बारे में एक किस्सा सुनाता हूं। मैंने ब्रिटेन के साथ पहला समझौता किया और हमने ब्रिटेन से कहा कि उन्हें आने वाले दो शुक्रवार तक इसे पूरा करना होगा। यानी, ट्रेन अगले दो शुक्रवार के बाद स्टेशन से निकल जाएगी क्योंकि कई अन्य देशों के साथ भी समझौते हो रहे हैं। आप जानते हैं जो पहले आता है वह पहले पाता है। राष्ट्रपति ट्रंप समझौते चरणबद्ध तरीके से करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो (देश) पहले चरण (पहली सीढ़ी) पर सौदा करता है, उसे सबसे बेहतरीन शर्तें मिलती हैं।’’ लुटनिक ने कहा कि ट्रंप इसी तरह से काम करते हैं ‘‘क्योंकि इस तरह से आपको बातचीत में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।’’ उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के बाद, हर किसी ने ट्रंप से पूछा कि अगला देश कौन सा होगा और राष्ट्रपति ने कई देशों के बारे में बात की ‘‘लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार भारत का नाम लिया।’’

मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए नहीं हुआ समझौता : लुटनिक

लुटनिक ने कहा, ‘‘हम भारत से बात कर रहे थे और हमने भारत से कहा, ‘आपके पास तीन शुक्रवार हैं।’ उन्हें यह काम पूरा करना ही होगा।’’ अमेरिका के वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हालांकि वह देशों के साथ समझौतों पर बातचीत करेंगे और पूरा सौदा तय करेंगे, ‘‘लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह उनका (ट्रंप का) समझौता है। वही अंतिम निर्णय लेते हैं। वही समझौता करते हैं। इसलिए मैंने कहा, ‘आपको मोदी को शामिल करना होगा, सब कुछ तय है, आपको मोदी से राष्ट्रपति को फोन करवाना होगा।’ भारत को ऐसा करने में असहजता महसूस हुई, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया।’’

लुटनिक ने कहा कि उस शुक्रवार के बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहा था और यह मान रहा था कि भारत उनसे पहले बातचीत पूरी कर लेगा। उन्होंने कहा, मैंने उनसे ऊंची दर पर बातचीत की थी। तो अब समस्या यह है कि समझौते ऊंची दरों पर हुए। फिर भारत ने फोन किया और कहा, ‘ठीक है, हम तैयार हैं।’ मैंने कहा, ‘तीन हफ्ते बाद, किस बात के लिए तैयार हैं’। मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने उनसे पूछा ‘क्या आप उस ट्रेन को पकड़ने के लिए तैयार हैं जो तीन हफ्ते पहले स्टेशन से निकल चुकी है? वाणिज्य मंत्री ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि हालात कभी-कभी बदलते रहते हैं। ऐसे उतार-चढ़ाव में कुछ देश गलत समय पर गलत कदम उठाते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

लुटनिक ने कहा कि भारत के मामले में भी यही हुआ और वे इसे (समझौते को) पूरा नहीं कर सके। उन्होंने कहा, ‘‘बाकी सभी देश समझौते करते रहे और भारत इस दौड़ में सबसे पीछे रह गया। लुटनिक ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब हाल में ट्रंप ने कहा था कि ‘‘मोदी जानते थे कि वह भारत के रूसी तेल खरीदने से नाखुश हैं और अमेरिका कभी भी भारत पर शुल्क बढ़ा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बयान दोनों देश के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान दिया। व्यापार समझौते पर अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है। इस समझौते में अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क के समाधान के लिए एक ढांचागत समझौता शामिल है।

Mukesh Kumar
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