Labour Bill 2026 : नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने बृहस्पतिवार को श्रमिक संघों की हड़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं देती और अब एक प्रस्तावित कानून के जरिये मजदूरों को भी नहीं बोलने देगी। उन्होंने लोकसभा में ‘औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आज केंद्रीय श्रमिक संघ, सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम संघ, बैंकिंग कर्मचारी, बीमा कर्मचारी, बिजली कर्मचारी, परिवहन श्रमिक और असंगित क्षेत्र के मजदूर हड़ताल पर हैं।
लेबर कोड संशोधन पर तीखी बहस, विपक्ष ने बताया ‘मजदूर विरोधी’ कानून
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के एक संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारियों एवं श्रमिकों ने, केंद्र सरकार की ‘‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों को लेकर अपना विरोध’’ जताने के लिए बृहस्पतिवार को एक दिवसीय हड़ताल की। सुले ने कहा, राष्ट्र निर्माण करने वाले लोग हड़ताल पर हैं, जब हम इस विधेयक पर चर्चा कर रहे हैं। मैं निजीकरण के खिलाफ नहीं हूं…लेकिन कंपनियों को श्रमिकों ने बनाया है। उन्होंने मेहनत की। जिन्होंने इस देश को यहां तक लाया, उसमें सबसे बड़ा योगदान किसानों और मजदूरों का रहा है। आज यह विधेयक उन्हीं के खिलाफ लाया गया है। उन्होंने 2023-24 की एक सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें यह उल्लेख किया गया है कि देश में 2,12,990 फैक्टरी हैं, जिनमें 1,32,722 में 50 से कम मजदूर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर संघों के पंजीकरण के लिए पहले 20 श्रमिकों की जरूरत होती थी, आज यह संख्या बढ़ा कर 50 कर दी। उन्होंने कहा, ‘‘इससे तो किसी भी मॉल में, बिग बास्केट जैसी दुकान आदि में यदि 50 से कम 49 श्रमिक भी हों तो वे श्रम संघ नहीं बना सकेंगे।’’
सुले ने कहा, ‘‘वे (श्रमिक) हड़ताल तो करना बंद ही कर देंगे। यहां (लोकसभा में) तो एलओपी (नेता प्रतिपक्ष) को भी नहीं बोलने देते। मुश्किल लड़ाई लड़ी तो सरकार ने एलओपी को बोलने दिया। अब मजदूरों को भी नहीं बोलने देंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत में 42 प्रतिशत कर्मचारी अनुबंध पर हैं चाहें वे गिग वर्कर हों या बीमा क्षेत्र में हों। सरकार ने उनके लिए क्या किया।’’ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की रानी श्री कुमार ने दावा किया कि संशोधन विधयक नियोक्ता को स्थायी नौकरियां खत्म कर अस्थायी आधार पर कर्मचारी रखने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा, ‘‘आर्थिक सुधार सामाजिक न्याय की कीमत पर नहीं हो सकता।’’ शिवसेना के रवींद्र वायकर ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कानून को स्पष्ट करने के लिए यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संशोधन लाया गया है। हालांकि, उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि गिग वर्कर के लिए न्यूनतम वेतन तय किये जाएं और काम के घंटे पर स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत है ताकि उनका शोषण न हो।
लेबर बिल पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
कांग्रेस के एम.के. विष्णु प्रसाद ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि कारोबार को आसान बनाने के नाम पर बाजार समर्थक सुधार किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘गिग वर्कर’ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन सरकार न्यूनतम पारिश्रमिक और नौकरी की बिल्कुल सुरक्षा नहीं देने की नीति पर आगे बढ़ रही है। भाजपा के जगदंबिका पाल ने कहा कि यह संशोधन विधेयक देश के श्रमिकों के ‘‘हक और हुकूक’’ में तथा श्रम की गरिमा बनाये रखने के लिए है। पाल ने कहा, सामाजिक सुरक्षा, श्रमिकों के हक और हुकूक की रक्षा के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन विधेयक विधिक ढांचे में श्रमिकों को सुरक्षा देता है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अरूण भारती ने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश के श्रमिक सबसे अधिक तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में प्रताड़ित किये जाते हैं। उन्होंने मांग की कि भारत का नागरिक जहां भी काम करे उसकी गरिमा और सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिए। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गुरुमूर्ति मड्डिला ने कहा कि संशोधन विधेयक अनुबंध श्रम, देर से वेतन मिलने से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं करता है। उन्होंने कहा कि एकीकृत कानून में राज्य विशिष्ट हकीकत को नजरअंदाज किया है। आम आदमी पार्टी के मालविंदर सिंह कंग ने कहा, ‘‘अग्निवीर के माध्यम से उन लाखों नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया जो देश की सेवा करना चाहते थे। अग्निवीर के माध्यम से न सिर्फ रोजगार को, बल्कि देश की सेवा करना चाह रहे नौजवानों को भी रोका जा रहा है।’’ उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से डेरी किसानों की रोजी-रोटी खत्म करने की साजिश हो रही है और अभी तक सरकार यह नहीं बता रही है कि क्या दबाव है?
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ई टी मोहम्मद बशीर ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा, ‘‘आपने नियोक्ता को खुला लाइसेंस दे दिया है कि वे अपनी पंसद के अनुसार चीजें करें…इस ‘हायर एंड फायर’ (भर्ती करो और निकालो) की प्रक्रिया में वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि श्रम संघों की सबसे बड़ी शक्ति ‘‘सामूहिक सौदेबाजी’’ के अधिकार में भी आपने कटौती कर दी। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से सौदेबाजी के अधिकार खत्म हो जाएंगे, बातचीत उनकी (नियोक्ता) के पसंद के अनुसार होगी। जनता दल (यूनाइटेड) के कौशलेंद्र कुमार ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे श्रमिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता सिद्ध होती है।




