रिपोर्टर : महेश चंद्र मिश्रा
Surya Grahan ( Falgun Amavasya 2026): जयपुर। फाल्गुन अमावस्या का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इसी दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा, फिर भी नियमों का पालन करना चाहिए। इस अवसर पर गंगा स्नान कर भगवान शिव की पूजा, जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है। साथ ही पितरों का तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है। अमावस्या तिथि पर देवों के देव महादेव की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकटों से मुक्ति मिलती है।
ज्योतिष विद्वान पं. अनिल कुमार विद्रोही के अनुसार फाल्गुन अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। सूर्य ग्रहण के दौरान राहु का प्रभाव बढ़ जाता है। ज्योतिष गणना अनुसार 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक 12 घंटे पूर्व लगता है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसके लिए सूतक मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद ग्रहण के दौरान शास्त्र द्वारा निर्धारित नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।

ज्योतिष विद्वान पं. अनिल कुमार विद्रोही के अनुसार यह सामान्य से काफी अलग यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होने वाला है। इसे बोलचाल की भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता है तो उसका बाहरी हिस्सा ऐसा नजर आता है मानो चमकती अंगूठी हो। वहीं फाल्गुन अमावस्या के दिन मेष राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस राशि के जातकों पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है। वहीं, मायावी ग्रह राहु, सूर्य देव को अपना शत्रु मानते हैं। मेष राशि के जातक शुभ काम न करें। वाणी और क्रोध पर कंट्रोल रखें। किसी से विवाद न करें। बड़ों की सेवा और सम्मान करें। ग्रहण के दौरान नकारात्मक जगहों पर जाने से बचें। भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनके नामों का जप करें।

वर्तमान समय में मायावी ग्रह केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। वहीं, सिंह राशि के स्वामी आत्मा के कारक सूर्य देव हैं और आराध्य भगवान विष्णु हैं। मायावी ग्रह राहु और केतु सूर्य देव को अपना शत्रु मानते हैं। सूर्य ग्रहण के दिन अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। अपनी सेहत का ध्यान रखें। तनाव की समस्या हो सकती है। बेवजह की बातों में ध्यान न दें। किसी से बहस न करें। किसी के प्रति बुरा न सोचें। यात्रा से बचें। किसी को उधार न दें। कारोबार से जुड़े अहम फैसले न लें। ग्रहण के समय विष्णु जी के नामों का जप करें। ग्रहण के बाद सफेद एवं पीले रंग की चीजों का दान करें।
सूर्य ग्रहण का समय( Timing of Solar Eclipse ):
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 03: 26 मिनट पर शुरू होगा। वहीं, इसका समापन रात 07: 57 मिनट पर होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, इस ग्रहण का असर सभी राशि के जातकों पर पड़ेगा। पंडित विद्रोही के अनुसार सभी जातकों को अपनी राशियों के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप करना चाहिए।
सूर्य ग्रहण कब, कहां और कैसे दिखेगा:(When and Where Solar eclipse?, Read date and time)
विशेष – सूर्य ग्रहण दोपहर से शाम तक चलेगा।
आंशिक ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 03:26 बजे
वलयाकार चरण की शुरुआत: शाम 05:12 बजे
ग्रहण का चरम समय शाम 05:42 बजे
वलयाकार चरण की समाप्ति: शाम 06:11 बजे
ग्रहण का पूर्ण समापन: शाम 07:57 बजे होगा।
कुल अवधि- लगभग 4 घंटे 31 मिनट
‘रिंग ऑफ फायर’ की अवधि: लगभग 2 मिनट 20 सेकंड
कहां-कहां दिखाई देगा:
वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण बेहद खास रहेगा। यह वलयाकार होगा। यह पूरे विश्व में दिखाई नहीं देगा। कुछ हिस्से के लोग ही इस अनूठी खगोलीय घटना के गवाह बन पाएंगे। इनमें अंटार्कटिका का सुदूर क्षेत्र, हिंद महासागर का दक्षिणी हिस्सा, रूस का मिनी स्टेशन और फ्रांस व इटली का कॉनकॉडिया स्टेशन।
यहां आंशिक रूप से दिखेगा
दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, मेडागास्कर, चिलीअर्जेंटीनका दक्षिणी हिस्सा।




