SCO Summit China: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखना चाहिए. दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई.
ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं : जिनपिंग
शी ने कहा, ‘चीन और भारत पूर्व की 2 प्राचीन सभ्यताएं हैं. हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं, और हम ग्लोबल साउथ के भी महत्वपूर्ण सदस्य हैं. हम दोनों अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने, और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी निभाते हैं. दोनों देशों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे मित्र बनें जिनके अच्छे पड़ोसी और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों, और ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं.’
#WATCH | तियानजिन, चीन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, "… चीन और भारत पूर्व की दो प्राचीन सभ्यताएँ हैं। हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं, और हम ग्लोबल साउथ के भी महत्वपूर्ण सदस्य हैं। हम दोनों अपने… pic.twitter.com/rCWDf5SUwY
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 31, 2025
संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “आज दुनिया सदी में एक बार होने वाले बदलावों से गुज़र रही है. अंतर्राष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक दोनों है. इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है. दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा- हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र लाने के लिए मिलकर काम करने, और एशिया और दुनिया भर में शांति और समृद्धि में अपना सच्चा योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को भी पूरा करना होगा” उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए.
मोदी और शी के बीच पिछले 10 महीनों में पहली मुलाकात
बता दें कि मोदी और शी के बीच यह लगभग पिछले 10 महीनों में पहली मुलाकात थी. व्यापार और शुल्क संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत एवं अमेरिका के संबंधों में अचानक गिरावट आई है. ऐसे में भारत एवं चीन के नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्व रखती है.