Wednesday, January 28, 2026
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‘आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल है’, माघ मेले से लौटते समय बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

माघ मेले से लौटते समय शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या पर स्नान से रोके जाने से मन व्यथित है। स्वामी ने कहा कि प्रयाग से वे आध्यात्मिक शांति की जगह भारी मन और रिक्तता के साथ लौट रहे हैं।

Swami Avimukteshwaranand News: माघ मेले में मौनी अमावस्या पर प्रशासन द्वारा कथित तौर पर स्नान करने से रोकने के बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को भारी मन से मेले से विदा हो गए. माघ मेला से प्रस्थान से पूर्व सरस्वती ने कहा, ‘आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं. प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहां से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी.’

‘मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि ‘प्रयाग में जो कुछ भी घटित हुआ, उसने ना केवल हमारी आत्मा को झकझोरा है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है. संगम की इन लहरों में स्नान करना, अंतरात्मा की संतृप्ति का मार्ग है, लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं.’

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना

शंकराचार्य के स्नान किए बिना माघ मेला से चले जाने को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘अत्यंत अनिष्टकारी घटना’ बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘भाजपा के दंभ ने अनादिकाल से चली आ रही सनातनी परंपरा को तोड़ दिया है. जगद्गुरु शंकराचार्य जी का बिना पवित्र स्नान किए माघ मेले को छोड़कर जाना अत्यंत अनिष्टकारी घटना है.’

‘संतों का मन दुखी करके कोई सुख नहीं पा सकता है’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसके साथी चाहते तो ‘सत्ता की हनक’ और ‘अहंकार’ त्याग कर अपने कंधों पर उनकी पालकी उठाकर उन्हें त्रिवेणी संगम स्नान पर पावन स्नान कराकर उनके मर्माहत सम्मान का मान रख सकते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि मगर भाजपाइयों को भ्रष्ट साधनों से अर्जित अपनी शक्ति का घमंड है जो उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है. यादव ने लिखा, ‘संतों का मन दुखी करके कोई सुख नहीं पा सकता है। भाजपा सनातन की भी सगी नहीं है। आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है। आहत संत अर्थात सत्ता का अंत.’

क्यों हुआ था विवाद ?

उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए संगम जा रहे थे. अत्यधिक भीड़ होने के कारण प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरकर स्नान के लिए जाने को कहा जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया.

मेला प्रशासन ने आरोप लगाया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थक पांटून पुल का बैरियर तोड़कर घाट की तरफ बढ़े. इससे पुलिस प्रशासन को व्यवस्था में संभालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इस घटना के बाद से सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चला और वह माघ मेला में स्नान किए बगैर बुधवार को प्रस्थान कर गए।

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Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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