Saturday, February 14, 2026
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Bengal SIR Row : वोटर लिस्ट विवाद पर सियासी संग्राम, चिदंबरम बोले- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नहीं सुलझीं सरकार की शिकायतें

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अधूरा बताते हुए कहा कि इससे राज्य सरकार की शिकायतें दूर नहीं हुईं। उन्होंने आयोग को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अदालत से “विशिष्ट निर्देश” देने की मांग की। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि जल्दबाजी और अस्पष्ट प्रक्रिया से लोकतांत्रिक भागीदारी कमजोर हुई और चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है।

Bengal SIR Row : कोलकाता। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हाल में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है। चिदंबरम ने कहा कि इन मुद्दों के निपटारे के लिए शीर्ष अदालत को निर्वाचन आयोग को “विशिष्ट निर्देश” देने की आवश्यकता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में हुए एसआईआर की आलोचना करते हुए इसे “लोकतांत्रिक भागीदारी को कमजोर करने” और “राज्य के चुनावी संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास” बताया।

निर्वाचन आयोग के लिए सुप्रीम कोर्ट आगे भी आदेश जारी करेगा

चिदंबरम ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि उच्चतम न्यायालय आगे भी निर्वाचन आयोग के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेगा। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, “माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती एसआईआर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की थी। अदालत ने यह कहते हुए आदेश पारित किया कि वह एसआईआर प्रक्रिया में किसी ‘बाधा’ की अनुमति नहीं देगी। प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस आदेश से पश्चिम बंगाल सरकार की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। निर्वाचन आयोग को उन शिकायतों पर कार्रवाई के लिए विशेष आदेश या निर्देश देने की आवश्कता है। क्या आगे और आदेश जारी किए जाएंगे, यह मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अदालत आयोग को और निर्देश देगी।”

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सोमवार को पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी। साथ ही राज्यों को कड़ा संदेश दिया कि इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को निर्धारित है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य व्यक्तियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश दिया। बनर्जी शीर्ष अदालत में स्वयं दलील पेश करने वाली पहली कार्यरत मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने अदालत से “लोकतंत्र को बचाने” के लिए एसआईआर प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था और आरोप लगाया था कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।

बंगाल SIR पर सियासी तूफान, कांग्रेस नेता ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

चिदंबरम ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन और संघीय ढांचे के मूल से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, यह लोकतंत्र, संघवाद और ‘जनता की सरकार’ की अवधारणा की जड़ से जुड़ा है। यदि बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित किया जाता है, तो उस चुनाव को जनता की सरकार चुनने वाला चुनाव कैसे कहा जा सकता है? निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता लोकतंत्र के हित में काम करनी चाहिए। विभिन्न राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि विवाद से बचने के लिए व्यापक परामर्श से तैयार स्पष्ट प्रारूप आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हितधारकों, खासकर राजनीतिक दलों से व्यापक परामर्श के बाद एक मानक प्रारूप तय होना चाहिए। प्रश्नावली, कार्यप्रणाली और गणनाकर्मियों के प्रशिक्षण की मदद से होने वाली जनगणना एक अच्छा उदाहरण है।”

पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर पर टिप्पणी करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उनका दृष्टिकोण सभी राज्यों के लिए समान है। उन्होंने कहा, “एसआईआर के लिए सहमति से बना कोई प्रारूप नहीं है; प्रक्रिया जल्दबाजी में की गई; निर्वाचन आयोग ने मनमाने बदलाव किए; यह पारदर्शी प्रक्रिया नहीं थी, जो लोगों का विश्वास जीत सके। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी कमजोर हुई।” यह पूछे जाने पर कि क्या यह प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी संतुलन को प्रभावित कर सकती है तो उन्होंने कहा, इसे चुनावी संतुलन प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया था। कितना प्रभाव पड़ा है, यह अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पुनरीक्षण से अल्पसंख्यकों, पलायन करने वालों और गरीबों (विशेषकर बेघर लोगों) पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

मुख्यमंत्री बनर्जी के इस आरोप पर कि एसआईआर में खामियां हैं और इससे राज्य में कई लोगों की जान गई, चिदंबरम ने कहा कि इस प्रक्रिया के परिणामों की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को लेनी चाहिए। हालांकि, कथित मौतों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीट पर अकेले चुनाव लड़ने संबंधी कांग्रेस की घोषणा पर उन्होंने कहा कि राज्य नेतृत्व जमीनी स्थिति को बेहतर समझता है। उन्होंने कहा, “बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजनीतिक परिस्थिति से भली-भांति परिचित है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अंतिम निर्णय पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता।” कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने हाल में घोषणा की थी कि पार्टी आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और पिछले चुनावों की तरह वामदलों के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

Mukesh Kumar
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