Cash-for-query Case: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश के एक हिस्से पर शुक्रवार को रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल को cash-for-query case मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा(Mahua Moitra) के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने पर विचार करने को कहा गया था.
महुआ मोइत्रा, CBI, निशिकांत दुबे को नोटिस
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ लोकपाल की याचिका पर मोइत्रा, CBI और भारतीय जनता पार्टी (BJP)सांसद एवं शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किए. शीर्ष अदालत ने 3 हफ्ते में नोटिस का जवाब मांगा है.
दिसंबर के आदेश में कही गई थी ये बात
हाईकोर्ट ने मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए CBI को मंजूरी देने संबंधी लोकपाल के आदेश को 19 दिसंबर, 2025 को निरस्त कर दिया था.
न्यायालय ने उस आदेश के पैरा 89 में कहा था, ‘हमने लोकपाल से अनुरोध किया है कि वह संबंधित प्रावधानों के अनुसार एक महीने के भीतर लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत स्वीकृति प्रदान करने पर विचार करें.’
हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 89 पर रोक लगाई
सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत उल्लिखित शक्तियों और प्रक्रियाओं से संबंधित याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 89 पर रोक लगा दी. कथित तौर पर पैसे लेकर सवाल पूछने का यह मामला इस आरोप से संबंधित है कि मोइत्रा ने एक व्यवसायी से नकदी और उपहार के बदले सदन में सवाल पूछे थे.




