Tuesday, February 3, 2026
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जंगल में यह इलाके की जंग है ! सरिस्का से दुखद खबर, टेरिटोरियल फाइट में बाघिन ST-28 की मौत

Sariska Tigress Death: अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में क्षेत्रीय संघर्ष के चलते बाघिन एसटी-28 की मौत हो गई। अकबरपुर रेंज के जंगल में उसका शव मिला, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। अधिकारियों के अनुसार, दो बाघ-बाघिन के बीच टेरिटोरियल फाइट में बाघिन की मौत हुई है। बढ़ती संख्या के कारण इलाकों को लेकर संघर्ष बढ़ रहा है।

Sariska Tigress Death: सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के बढ़ते कुनबे के बीच इलाके की जंग बढ़ती जा रही है। इस बार यह टेरिटोरियल फाइट सोमवार को बाघिन एसटी-28 की मौत के रूप में सामने आई। आपको बता दें कि इलाके की खोज में यहां सब एडल्ट(उप वयस्क) बाघ नए इलाकों की तरफ रुख भी करने लगे हैं। ऐसे में यहां बाघों के बढ़ते कुनबे के बीच यह बड़ी चुनौती बन गया है।

जानकारी के अनुसार, सरिस्का बाघ परियोजना के अकबरपुर रेंज में पृथ्वीपुरा बीट डाबली के वन क्षेत्र में सोमवार को ग्रामीणों ने बाघिन एसटी-28 का शव देखा। उन्होंने इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी। जिसके बाद वन संरक्षक व क्षेत्रीय निदेशक, उप वन संरक्षक, पशु चिकित्सक दल और समस्त फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचा। सभी जांच प्रक्रिया अपनाने के बाद बाघिन का पोस्टमोर्टम तीन 3 डॉक्टर की टीम द्वारा किया गया। अधिकारियों के अनुसार बाघिन के समस्त अंग पाए गए और कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिले। इस पर पुलिस और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में एनटीसीए के निर्धारित प्रोटोकोल के अनुसार बाघिन एसटी-28 का अंतिम संस्कार किया गया। माना जा रहा है कि दो बाघ-बाघिन के बीच में टेरिटरी फाइट में टाइग्रेस की मौत हुई है।

नर शावक ‘सांगा’ की तलाश जारी

दरअसल, सरिस्का में बाघों के कुनबे की संख्या कुल 50 थी। इनमें 11 नर बाघ, 18 बाघिन और 21 शावक हैं। बाघिन एसटी-28 की मौत के बाद यह संख्या 49 रह गई है। बाघों का कुनबा बढ़ने से सरिस्का कोर एरिया पहले से ही फुल है। यहां ताकतवर नर बाघ एसटी-20 और एसटी-29 का वर्चस्व कायम है। ऐसे में बाघिन एसटी-12 का नर शावक ‘सांगा’ कई दिनों से यहां अपने नियमित इलाके में नजर नहीं आया है। हालांकि, वन विभाग ने यहां कैमरा ट्रैप की संख्या बढ़ाई है और शावक की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। उधर, वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जब नर शावक 2 साल के लगभग उम्र पार कर लेते हैं, तो वे अपनी खुद की टेरिटरी (इलाका) बनाना चाहते हैं। ऐसे में वे नए इलाके की तलाश में पहले से ही मौजूद ताकतवर बाघों से दूर भागते हैं। रणथंभौर रिजर्व में यह समस्या बढ़ती जा रही है, वहीं सरिस्का में अभी शुरुआती दौर में है जिस पर उचित कदम उठाने की जरूरत है।

सरिस्का टाइगर फाउंडेशन के संस्थापक सचिव दिनेश दुर्रानी ने कहा कि सरिस्का से टाइग्रेस एसटी-28 का चले जाना दुखद है। जहां तक इलाके की बात है नर बाघ को करीब 40 से 50 वर्ग किमी. और मादा को 20 से 30 वर्ग किमी. क्षेत्र टेरिटरी के लिए जरूरत है। पिछले दो सालों में ही सरिस्का में करीब 20 शावकों का जन्म हो चुका है, जो वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सुखद संकेत है। जंगल में वन्यजीव संघर्ष सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, यहां गांवों का विस्थापन अभी चुनौती बना हुआ है, जिससे मानव—वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की संभावना भी रहती है।

सरिस्का के फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने कहा कि सरिस्का में वन्यजीवों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। सभी स्टाफ पूरी सतर्कता से अपनी ड्यूटी कर रहा है और नियमित गश्त भी की जा रही है। एसटी-12 के सब एडल्ट सांगा को खोजने के लिए अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। उच्च अधिकारियों को बाघों की मॉनिटरिंग के लिए रेडियो कॉलर का औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है।

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Premanshu Chaturvedi
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