Bihar News : पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने विरासत को कथित तौर पर नष्ट करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों की शनिवार को आलोचना की और दावा किया कि इसके लिए बाहरी लोगों की जरूरत नहीं है। आचार्य ने ‘एक्स’ पर की गई अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन लोगों के निशान मिटाने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने एक विरासत को पहचान और अस्तित्व दिया।
विरासत को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती : रोहिणी आचार्य
आचार्य ने ‘एक्स’ पर लिखा, बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई बड़ी विरासत को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, ‘अपने’ और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी ‘नये बने अपने’ ही काफी होते हैं। किसी का नाम लिए बिना, उन्होंने यह भी दावा किया कि हैरानी तो तब होती है, जब जिसकी वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आकर मिटाने और हटाने पर अपने ही आमादा हो जाते हैं।
बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) January 10, 2026
हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के…
जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है: रोहिणी आचार्य
आचार्य ने कहा, ‘‘जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब विनाशक ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है।’’ ऐसी अटकलें हैं कि वह प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से निष्कासित किये जाने से ‘‘नाखुश’’ थीं। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद आचार्य ने राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी और परिवार से संबंध तोड़ लिये थे। उन्होंने पिछले साल नवंबर में लिखी अपनी पोस्ट में कहा था, ‘‘ मैं राजनीति छोड़ रही हूं और मैं अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं… संजय यादव और रमीज ने मुझे यही करने को कहा था… और मैं सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले रही हूं।’’
संजय यादव राजद के राज्यसभा सांसद हैं और राजद प्रमुख के बेटे एवं उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं। रमीज को तेजस्वी का पुराना दोस्त बताया जाता है, जो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। आचार्य कुछ साल पहले अपने पिता को किडनी देने के कारण सुर्खियों में थीं। उन्होंने पिछले साल सारण से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी।




