Rajasthan Assembly: जयपुर। राजस्थान में खांसी की दवा (Cough Syrup) लेने से कथित तौर पर हुई मौतों के मुद्दे को लेकर मंगलवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। राज्य सरकार ने कहा कि ये मौतें अधिक मात्रा में दवा लेने व अन्य बीमारियों (ओवरडोज और कोमोरबिडिटी) के कारण हुईं क्योंकि दवा बिना चिकित्सकीय सलाह के ली गई थी प्रतिपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। इसके बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। इंसानों और जानवरों के बीच होने वाले संघर्ष में हुई मौतों का मुद्दा भी सदन में उठा जिसके बाद राज्य सरकार ने जंगली जानवरों के हमलों से होने वाली मानवीय मौतों के लिए मुआवजे को दोगुना करने के प्रस्ताव की घोषणा की। बाड़ी (धौलपुर) से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक जसवंत गुर्जर के एक सवाल के जवाब में वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने जंगली जानवरों के हमलों से होने वाली मौतों के लिए मुआवजा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का फैसला किया है। उन्होंने सदन को बताया कि बढ़े हुए मुआवजे को लागू करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।
वहीं, कांग्रेस ने अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि के बावजूद मुफ्त दवा योजना के तहत कम खर्च और अक्टूबर 2025 में सरकार द्वारा आपूर्ति की गई ‘कफ सिरप’ के सेवन से कथित तौर पर बच्चों की मौतों की खबरों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इन मुद्दों पर सवाल किए। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कांग्रेस नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जिस दवा (कफ सिरप) की बात हो रही है वह सरकारी चिकित्सकों की सलाह पर नहीं ली गई। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘अगर चिकित्सकों के प्रिस्क्रिप्शन(परामर्श) पर दवाएं दी जाती हैं और मौतें होती हैं तो जिम्मेदारी संबद्ध चिकित्सक व सरकार की होती है। लेकिन, अगर कोई बाहर से दवाएं लाता है और मौतें होती हैं, तो न तो चिकित्सक और न ही सरकार जिम्मेदार है।’
खींवसर ने कहा कि ‘कफ सिरप’ मामले में ज्यादा मौतें नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि ‘दो से चार या पांच मौतों की सूचना है।’ उन्होंने कहा कि माता-पिता ने बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को खुद ही ‘कफ सिरप’ की खुराक दी थी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस दवा में कोडीन जैसे रसायन होते हैं और कथित मौतें ‘ओवरडोज और कोमोरबिडिटी’ के कारण हुईं। मंत्री ने यह भी कहा कि वही ‘कफ सिरप’ 2014 से इस्तेमाल में है जिसमें पिछली कांग्रेस सरकार का कार्यकाल भी शामिल है। इसके जवाब में जूली ने कहा कि कफ सिरप बनाने वाली कंपनी को कई जगहों पर काली सूची में डाला गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या समय के साथ दवा की गुणवत्ता खराब हुई। इसके बाद सदन में नियमित कार्यवाही हुई।




