नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में तेजी लाने का संकेत देते हुए कहा है कि अब इसे जमीन पर उतारने का समय आ गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के प्रावधान के साथ कराए जाने चाहिए।
संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा के नेताओं को पत्र लिखकर सभी दलों से इस मुद्दे पर सहयोग की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े आवश्यक संशोधनों को पारित करने के लिए व्यापक समर्थन जुटाया जाए, ताकि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित हिस्सेदारी देने के लिए अब और देरी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने इस कदम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
सरकार ने इस उद्देश्य से संसद का एक विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इस दौरान कानून में जरूरी बदलावों पर चर्चा और निर्णय किया जाएगा।
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित होंगी। यह प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिए लाया गया था, जिसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई थी।
हालांकि मौजूदा व्यवस्था के अनुसार यह आरक्षण जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो सकता था, जिससे इसके लागू होने में काफी समय लगने की संभावना थी। ऐसे में सरकार अब इसे जल्द प्रभावी बनाने के लिए कानून में बदलाव करने की दिशा में कदम उठा रही है।
यदि प्रस्तावित संशोधन पारित हो जाते हैं, तो महिलाओं को 2029 के चुनावों से ही आरक्षण का लाभ मिल सकता है। इसे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, सरकार का यह प्रयास देश की लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।



