Rajasthan University PhD Scam: जयपुर। एक शोधार्थी के बिना परीक्षा ‘पास’ किए पीएचडी कोर्स वर्क पूर्ण करने के प्रमाणपत्र ने बवाल मचा दिया है। राजस्थान यूनिवर्सिटी के लोक प्रशासन विभाग की एचओडी (विभागाध्यक्ष) और पाठ्यक्रम मंडल (लोक प्रशासन) संयोजक इस मामले को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। संयोजक डॉ ओम महला ने इस संबंध में कुलपति को शिकायत कर एचओडी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी पर हुआ इसका उलटा। कार्रवाई तो हुई नहीं शोधार्थी के कोर्स वर्क पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। डॉ ओम महला ने यह शिकायत पांच जनवरी को कुलपति को भेजी थी जबकि एचओडी के प्रमाण पत्र पर यूनिवर्सिटी डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से 15 जनवरी को मोहर लगा दी गई। अब समझ में यह नहीं आ रहा कि दो बार अनुपस्थित-फेल हुए शोधार्थी ने परीक्षा कब दी और पास कैसे हो गए, क्योंकि संयोजक महिला को तो इसकी जानकारी तक नहीं हुई कि यह हो कैसे गया?
बिना परीक्षा पास किए जारी हुआ प्रमाणपत्र
सूत्रों के अनुसार डॉ ओम महला की ओर से कुलपति को भेजे गए शिकायती पत्र में कहा गया था कि संजय सिंह शेखावत ने वर्ष 2024 में पीएटी 2021-22 के तहत लोक प्रशासन विभाग मे पीएचडी कोर्स में प्रवेश लिया।। वह नवंबर 2024 में आयोजित पीएचडी कोर्स परीक्षा में तीन सैद्धांतिक प्रश्न-पत्रों में अनुपस्थित रहने के कारण उक्त परीक्षा में फेल हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय शोध अनुभाग के निर्देशानुसार सितंबर 2025 में पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा दोबारा आयोजित की गई, लेकिन इसमें भी संजय सिंह अनुपस्थित रहे और फेल हुए। इस पत्र में आगे कहा गया कि एचओडी डॉ शालिनी चतुर्वेदी ने विभागाध्यक्ष पदभार संभालने के बाद तीस अक्टूर 2025 को एक पत्र जारी कर पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा करवाने के लिए परीक्षकों का पैनल मांगा,क्योंकि पाठ्यक्रम मण्डल के संयोजक वो हैं, इस पर जब पैनल के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

प्रक्रिया का उल्लंघन
इस पत्र में कहा कि उन्हें पता चला कि एचओडी ने संजय शेखावत को पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा पूर्ण होने का प्रमाण पत्र तक जारी कर दिया है। जो कि नियमों का उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक यह परीक्षा पाठ्यक्रम मंडल संयोजक से पैनल लेकर ही आयोजित कराना आवश्यक है। बावजूद इसके एचओडी ने बिना विषय परीक्षकों के पैनल लिए संजय सिंह को पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। एचओडी का यह कार्य पूरी तरह विश्वविद्यालय के नियमों व स्थापित प्रक्रिया के खिलाफ है। ऐसे में प्रमाण पत्र को रद्द कर एचओडी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
संयोजक को क्यों रखा गया अंधेरे में?
शिकायती पत्र पर जांच- कार्रवाई तो नहीं हुई 15 जनवरी को संजय सिंह के कोर्स वर्क पूर्ण करने के प्रमाण-पत्र पर मोहर लगा दी गई। परीक्षा ली तो परीक्षा संयोजक को क्यों अंधेरे में रखा गया? नियमों के जरिए हुई तो संयोजक को सूचित क्यों नहीं किया गया, परीक्षकों का पैनल क्यों नहीं मांगा गया? एचओडी और संयोजक जब एक ही डिपार्टमेंट में हैं तो संजय सिंह शेखावत के मामले में विवाद को बैठकर क्यों नहीं सुलझाया गया?
पीएचडी में घालमेल!
छात्र राजनीति से सांसद-विधायक बने अथवा अन्य राजनीतिक पदों पर पहुंचे अधिकांश ‘नेता’ पीएचडी होल्डर हो गए। राजनीति में इतनी व्यस्तता के बाद इनके शोध कार्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं? कुछ ऐसे ही शोधार्थियों को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आए थे। अधिकांश यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पीएचडी का तमगा लिए घूम रहे हैं। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।




