Friday, May 24, 2024
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    अब कोई नही कहेगा आपको 420, IPC की धारा 420 में किया गया बदलाव

    जिंदगी बड़ी 420 है इतनी आसानी से पिछा नही छोड़ती… ये डॉयलाग राजकपूर की मशूहर फिल्म श्री 420 का है… जिसे आपने कई बार सुना होगा… आज हम इसकी बात इसलिए कर रहे है क्योकि 11 अगस्त 2023 को भारत की संसद में केंद्र सरकार ने इस कानून से जुड़ी धारा 420 में बदलाव किया है…

    420 शब्दो का उपयोग तंज करने के लिए किया जाता है …सिनेमा समाज का आईना होता है समाज की हर बुराई और अच्छाई को कलाकारों ने अपने अभिनय से पर्दे पर उतारा है….. समाज की खामियों को पहचान कर सिनेमा उस पर उंगली रखता है, और समाज उसे स्वीकार कर, ठीक कर आगे बढ़ता है. समाज में डाकू से लेकर डॉन तक आए. समाज की एक बुराई चोरी और ठगी की वारदातों को भी सिनेमा से दिखाया. इन बुराईयों को लेकर पहले राजकपूर और नरगिस की मूवी श्री 420 आई. इसके बाद 1997 में कमल हसन की मूवी चाची 420 आई. फिर 2005 में अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की फिल्म बंटी और बबली में समाज की इस बुराई को दर्शाया गया.

    अक्सर जब भी आपको कोई धोखा देता है या आपके साथ ठगी करता है तो आप उसको फर्जी या 420 कहकर बुलाते है कई बार तो हम 420 शब्द का उपयोग तंज कसने के लिए भी करते है 420 शब्द को मुहावरो में यूज किया जाता है किसी को 420 कह दो, तो वो बेहद नाराज हो जाता है.

    फिलहाल भारत में इस कानून की धारा में बदलाव कर दिया है गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को संसद में कानून बदलने से जुड़े तीन बिल पेश किए. जिसमें IPC की धारा 420 भी शामिल है. 163 साल पुराने इस कानून को अब 2023 की धारा 316 के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा.

    अमेरिका से 420 की शुरुआत

    420 नंबर के बदनाम होने की कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में कुछ छात्रों का समूह सैन राफैल में रहता था. इन छात्रों का समूह नशाखोरी में लिप्त होने के साथ अन्य गतिविधियों में शामिल रहता था. छात्रों को यह समूह हर दिन शाम 4.20 बजे एक स्थान पर मिलता थे. छात्रों की ये मुलाकातें लुईस पास्चर की बड़ी सी प्रतिमा के नीचे होती थी, जहां ये छात्र सामूहिक रूप से फ्री में गांजे और चरस का सेवन करते थे. यहीं से छात्रों का ये गैंग लुईस 420 नाम के कोड नाम से मशहूर हुआ. और फिर धीरे धीरे इस ग्रुप के सभी लोगों को 420 कहा जाने लगा. इसमें से कुछ लड़के तमाम ठगी के आरोपों में पकड़े गए और फिर धीरे धीरे 420 नंबर ठगों की पहचान बन गया. साथ ही नशेखोरी खासकर गांजे और चरस का सेवन करने वालों के लिए भी. मौजूदा समय में किसी भी फ्रॉड को बुलाना है, तो 420 कहना ही काफी हो चला है. कॉन ऑर्टिस्ट भी खुद को 420 ही समझते हैं

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