Wednesday, April 8, 2026
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इसरो प्रमुख वी नारायणन का बड़ा बयान, बोले—लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों की सफलता के लिए मिशन संचालन सबसे अहम

वी. नारायणन ने तीन दिवसीय सम्मेलन स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशन्स कॉन्फ्रेंस 2026 में कहा कि मिशन संचालन भारत के विस्तारित अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता की कुंजी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन प्रमुख ने चंद्रयान-3 की सफलता को टीमवर्क और सटीक संचालन का परिणाम बताया। उन्होंने एआई और क्लाउड तकनीक को भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ISRO Chairman V Narayanan : बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बुधवार को मिशन संचालन के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे भारत के विस्तारित अंतरिक्ष कार्यक्रम की कुंजी बताया। वह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस (एसएमओपीएस-2026) में वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय था ‘स्मार्ट और टिकाऊ अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन के लिए नवाचारपूर्ण संचालन – अगली पीढ़ी’। नारायणन ने कहा, ‘‘मिशन संचालन महत्वपूर्ण हैं, खासकर लंबी अवधि वाले मिशन के लिए। यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

SMOPS-2026 सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा : नारायणन

रोस्कोस्मोस, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी, सेंटर नेशनल डी’एट्यूड्स स्पैटियल्स (सीएनईएस) समेत प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए, इसरो प्रमुख ने कहा कि यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि इसने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता, स्टार्टअप और व्यापक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को एक साझा मंच पर एक साथ लाया है। उन्होंने कहा, यह महज एक सम्मेलन नहीं है बल्कि यह कई देशों, विशेषज्ञों, स्टार्टअप और इससे संबंधित भागीदारों की भागीदारी के साथ एक बहुत बड़ा वैश्विक आयोजन है।

नारायणन ने ‘चंद्रयान-3’ मिशन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ‘‘ऐतिहासिक लैंडिंग’’ निरंतर टीम वर्क और परिचालन सटीकता का परिणाम थी। उन्होंने मिशन नियंत्रण में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के नेतृत्व और निरंतर भागीदारी को श्रेय देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण चरण के दौरान उनका योगदान अपरिहार्य रहा। इसरो प्रमुख ने ‘चंद्रयान-2’ मिशन के बाद सामने आई चुनौतियों को भी याद करते हुए कहा कि बाद की सफलता ने भारत की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा, ‘‘चंद्रयान-2 की आंशिक विफलता के बाद चंद्रयान-3 को त्रुटिहीन होना ही था।’’ उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को वैश्विक मान्यता मिली है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की 1962 में स्थापना के बाद से हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए, नारायणन ने कहा कि देश ने प्रक्षेपण यानों, वैज्ञानिक अन्वेषण और उपग्रह संचालन समेत विभिन्न प्रकार के मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि जहां रॉकेट थोड़े समय के लिए काम करते हैं, वहीं अंतरिक्ष यानों को कई वर्षों तक निरंतर निगरानी और नियंत्रण की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, एक रॉकेट केवल 15 से 25 मिनट तक ही काम करता है, लेकिन अंतरिक्ष यान को कक्षा में स्थापित करने के लिए उसे अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करनी पड़ती है। हालांकि, अंतरिक्ष यान को वर्षों तक – कभी-कभी दो से 15 वर्षों तक – काम करना पड़ता है। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि आदेशों के क्रियान्वयन में मामूली सी भी गलती पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती है। नारायणन ने मिशन संचालन में बदलाव लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड-आधारित प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व पर जोर दिया।

Mukesh Kumar
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