रिपोर्टर- मनीष शर्मा
Republic Day Special: आज 26 जनवरी है. यानी गणतंत्र दिवस. सदियों तक अलग—अलग शासकों की गुलामी झेलने के बाद भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बन गया। भारत में खुद का बनाया हुआ संविधान लागू हुआ, जिसने हमें मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, राष्ट्रीय प्रतीक और संसंद जैसी संस्थाएं दीं. हमें बताया कि व्यक्ति के ऊपर संविधान है. क्योंकि यह किसी एक चेहरे का देश नहीं बल्कि नागरिकों का गणराज्य है. और यही सबसे बड़ी पहचान है। ऐसे में हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम संविधान के बारे में जानें और उसके प्रावधानों का पालन करें।
आज देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर हम आपको मिलवा रहे हैं 13 वर्षों से राजनीति विज्ञान पढ़ा रहे गुरुजी से. जिन्होंने लोगों को संविधान के प्रति जिम्मेदारी का आभास कराने और जागरूक करने के उद्देश्य से अपने घर का नाम ही संविधान रख लिया। यहां बात हो रही है जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. दिनेश गहलोत की, जिनका कहना है कि संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं तो कर्तव्यों का पालन करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है जिसे भूलना नहीं चाहिए। वर्तमान में अंबेडकर अध्ययन केन्द्र के निदेशक के रूप में भी डॉ. गहलोत अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब पढ़ते-पढ़ाते जीवन में संविधान को आत्मसात कर लिया। यही कारण है कि अब तो आसपास के लोग भी उन्हें संविधान साहब कहकर पुकारने लगे हैं।
घर बनवाते ही नाम रखा ‘संविधान’
उन्होंने बताया कि पढ़ते—पढ़ाते मन में संविधान से जुड़े तथ्यों और नई जानकारियों को जानने की ललक बढ़ती गई। इसी का नतीजा है कि 2020 में जब उन्होंने अपना घर बनवाया, तो उसका नाम ही संविधान रख दिया। उन्होंने घर में एक लाईब्रेरी भी बनवाई, जहां संविधान से जुड़ी प्रतियां और किताबें रखी हुई है। संविधान के प्रति दीवानगी कहो या एक सच्चे नागरिक की जिम्मेदारी…इन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम भी समीक्षा और लिपिका रखे। उन्होंने बताया कि समीक्षा शब्द संविधान की समीक्षा के बारे में काम आता है और लिपिका एक सॉफ्टवेयर है जो इंग्लिश से हिन्दी में अनुवाद करता है।
प्रस्तावना की काॅपी मेहमानों को करते हैं गिफ्ट
डॉ. गहलोत ने बताया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर वे रोजाना संविधान के बारे में नई जानकारी अपलोड करते हैं। संविधान के बारे में जागरूक करने के लिए सितम्बर 2023 में संविधान आपके द्वार कार्यक्रम शरू किया। इसके तहत स्कूल और महाविद्यालय में जाकर भारतीय संविधान पर चर्चा की जाती है। ऐसी तीस गोष्ठियां हो चुकी हैं। 9 दिसम्बर 2021 को संविधान निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विद्यार्थियों को समझाने के लिए करीब 12 हजार पन्नों की चर्चा शुरू की, जो करीब 170 मीटिंग्स के जरिये पिछले साल ही पूरी हुई। संविधान संशोधनों पर चर्चा के लिए हर रविवार ऑनलाइन कार्यशाला करते हैं। अब तक 33 कार्यशालाओं में 73 संशोधनों पर चर्चा की जा चुकी है। इसके साथ ही, अपने घर आने वाले मेहमानों को भी भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रति उपहार में देते हैं।
रोचक तथ्य…
- संविधान सभा में 389 सदस्यों में से एक लाख से अधिक शब्द बोलने वाले सदस्यों में केवल डॉ. बीआर. अम्बेडकर, एच.वी. कामथ, प्रोफेसर के.टी. शाह, नजरूदीन अहमद और ठाकुर दास भार्गव थे।
- महात्मा गांधी सभा के सदस्य नहीं थे, लेकिन हर दिन उनका नाम या उनकी शिक्षाओं पर चर्चा की जाती थी ।
- मुस्लिम लीग ने सभा का बहिष्कार किया था, लेकिन देश विभाजन के बाद कई सदस्यों ने संविधान निर्माण में अपना योगदान दिया।




