Jawahar Kala Kendra Jaipur : जयपुर। जयपुर की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले जवाहर कला केन्द्र (JKK) ने अपना 33वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। जहां मुख्य आकर्षण प्रदेश के बाल लोक कलाकार रहे, जिन्होंने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कला एवं संस्कृति विभाग की संयुक्त सचिव और जेकेके की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगिया ने बताया कि इस वर्ष ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ के अंतर्गत प्रशिक्षित बच्चों को पहली बार विशेष मंच दिया गया है। रंगायन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। दर्शकों ने तालियों की गूंज से उनका भरपूर उत्साहवर्धन किया।
गुलजार वायलिन अकादमी के कलाकार सुजान हुसैन, राहुल कुमावत और साथियों के साथ बासुंरी पर तन्मय जोशी ने की शानदार प्रस्तुति ने सबका मन मोहा। बांसुरी की मधुर तान में जैसे प्रकृति की सांसें बसती हैं, हर सुर दिल को छूता नजर आया। सुरों में ऐसी शांति, सुकुन का आभास हुआ, जो मन को ठहरना और महसूस करना सिखा गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सादिक खान लंगा और उनके दल की मधुर लंगा गायकी से हुई। उन्होंने “गजानंद जी आवो” से गणेश वंदना प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद “चैरा री माखी”, “चरखो”, “जीवडो” और “धोरा वालो देश” जैसे लोकगीतों ने मरुधरा की संस्कृति की झलक पेश की। इसके बाद बाल कलाकारों ने पारंपरिक चरी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें सिर पर जलती चरी रखकर शानदार संतुलन दिखाया गया। शेखावाटी का प्रसिद्ध चंग नृत्य भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें चंग और ढप की थाप पर ऊर्जावान प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम का समापन बालोतरा के कलाकारों द्वारा “घेरा” और “सठिया” की प्रस्तुति तथा मनमोहक मारवाड़ी घूमर नृत्य के साथ हुआ। इन नन्हे कलाकारों ने साबित कर दिया कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित हाथों में है और नई पीढ़ी इसे पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है। समारोह में मुजफ्फर रहमान और उनके समूह की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहीं। जिसमें 14 कलाकार मिलकर गायन और वादन का अनूठा संगम पेश किया।



