Chandrayaan 4 Mission : बेंगलुरु। इसरो ने चंद्रयान-4 मिशन शुरू होने से कम से कम दो साल पहले ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अपने लैंडर के उतरने के लिए एक स्थल की पहचान कर ली है। केंद्र सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है। इस मिशन के तहत चंद्रमा के नमूने लाए जाएंगे। यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्रमा मिशन होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने पहले कहा था, ‘हम चंद्रयान-4 के लिये 2028 का लक्ष्य रख रहे हैं।’
चंद्रयान-4 के लिए इसरो ने तय की लैंडिंग साइट
इसरो के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने मोंस माउटन (एमएम) क्षेत्र के चार स्थलों का चयन किया और उनमें से एक को चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए उपयुक्त पाया। मोंस माउटन चंद्रमा का एक क्षेत्र है। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एमएम-1, एमएम-3, एमएम-4 और एमएम-5 स्थानों की पहचान की, जिनमें से एमएम-4 को लैंडिंग के लिए चुना गया। उन्होंने कहा, मोंस माउंटेन क्षेत्र के चारों स्थलों को उनकी ऊंचाई और ज़मीन की आकृति के आधार पर ऑर्बिटर हाई रिजॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) और विभिन्न तस्वीरों की मदद से पूरी तरह से जांचा गया।
नमूना वापसी मिशन की ओर भारत, चंद्रयान-4 की लैंडिंग जगह फाइनल
अधिकारियों ने कहा, इस दौरान पता चला कि एमएम-4 के आसपास एक किलोमीटर लंबा और एक किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र सबसे सुरक्षित है। यहां की औसत ढलान पांच डिग्री, औसत ऊंचाई 5334 मीटर है, और 24 मीटर लंबे व 24 मीटर चौड़े सबसे ज्यादा सुरक्षित ग्रिड हैं। इसलिए, चंद्रयान-4 मिशन के लिए एमएम-4 को उपयुक्त जगह माना जा सकता है।
चंद्रयान-4 में पांच मुख्य हिस्से प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम), डिसेंडर मॉड्यूल (डीएम), एसेंडर मॉड्यूल (एएम), ट्रांसफर मॉड्यूल (टीएम) और री-एंट्री मॉड्यूल (आरएम) हैं। डीएम और एएम से मिलकर एक स्टैक बनेगा, जो चंद्रमा की निर्धारित सतह पर धीरे-धीरे उतरेगा। एएम और डीएम के सही मार्ग और नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम की मदद से मुख्य लैंडिंग होगी। साथ ही, सुरक्षित लैंडिंग के लिए ऐसा लैंडिंग स्थल चुना जाएगा जो लैंडर की सभी जरूरतों के अनुरूप हो।




