Iran Israel War: इजराइल ने ईरान के प्रमुख प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर और हमले नहीं करने का वादा किया है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं. इस बढ़ते संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अर्थव्यवस्था में व्यापक असर देखने को मिल रहा है. इन हमलों के बाद ईंधन के दामों में तेजी से वृद्धि हुई और ईरान के पड़ोसी अरब देशों के युद्ध में सीधे उतरने का खतरा बढ़ गया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के लगातार अवरोधों के कारण पहले से दबाव झेल रही वैश्विक ईंधन आपूर्ति ईरान के इन हमलों से और अधिक दबाव में आ रही है. होर्मुज जलडमरूमध्य एक अहम जलमार्ग है. दुनिया में जो कुल तेल परिवहन होता है, उसका पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.
नेतन्याहू ने किया ईरानी गैस फील्ड में हमले नहीं करने का वादा
ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की जिसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार देर रात कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर इजराइल अपतटीय गैस क्षेत्र पर फिलहाल कोई हमला नहीं करेगा.
‘ईरान के पास नहीं रही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता’
अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू किए जाने के बाद, ईरान के कई शीर्ष नेता हवाई हमलों में मारे गए हैं और कहा जा रहा है कि देश की सैन्य क्षमताएं कमजोर हुई हैं. वहीं, नेतन्याहू ने टेलीविज़न पर प्रसारित एक संबोधन में कहा कि अब ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं रही है, हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया.
ईरान लगातार अरब देशों को बना रहा निशाना
ईरान का नेतृत्व अब मुजतबा खामेनेई कर रहे हैं जो इस युद्ध में मारे गए देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे हैं. ईरान अब भी खाड़ी के अरब पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. इस क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लगा दी गई और कतर के पास एक अन्य जहाज क्षतिग्रस्त हो गया. एक ईरानी ड्रोन से लाल सागर में स्थित सऊदी अरब की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया गया.
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
बता दें कि इजराइल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमलों के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं.




