Iran Protest: ईरान में आर्थिक संकट के कारण 12 दिनों से चल रहा प्रदर्शन अब उग्र हो चला है. प्रदर्शन की आग राजधानी तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक फैल चुकी है. 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों के हजारों लोग सड़कों पर हैं. प्रदर्शन के बीच गुरुवार को हालात और ज्यादा बिगड़ गए. जिसके चलते खामनेई सरकार को इंटरनेट बंद करना पड़ा और फोन लाइन्स काट दी गई. इससे ईरान का पूरी दुनिया से संपर्क टूट गया है.
#IranProtests
— Danial 𓃬☼ (@DanielTaghaddos) January 9, 2026
Day 12, Thu 8 Jan ‘26, Tehran, Geisha. People are calling for return of Shah Reza Pahlavi.
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इंटरनेट और फोन सेवा बंद
दरअसल ईरान के निर्वासित युवराज के आह्वान पर तेहरान और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गुरुवार रात को देश में इंटरनेट और टेलीफोन लाइन काट दी गईं. इंटरनेट कंपनी ‘क्लाउडफ्लेयर’ और एक अन्य कंपनी ‘नेटब्लॉक्स’ ने इंटरनेट संपर्क टूटने की बात कही और दोनों ने इसके लिए ईरान सरकार के हस्तक्षेप का दावा किया.
प्रदर्शन में अब तक 45 की मौत
एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में चल रहे प्रदर्शन के चलते अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 8 नाबालिग भी शामिल हैं. एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया गया है और सेना को अलर्ट पर रखा गया है.
12th day of anti-establishment protests in Iran
— Ghoncheh Habibiazad | غنچه (@GhonchehAzad) January 9, 2026
Video shows a statue of IRGC commander Qassem Soleimani on fire in his hometown of Kerman. Soleimani died in 2020 in a drone strike ordered by Donald Trump.
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ईरान में प्रदर्शन की आखिर क्या है वजह ?
ईरान में जनता का आक्रोश आर्थिक समस्याओं को लेकर सीधे सुप्रीम लीडर के खिलाफ देखने को मिल रहा है. देश में महंगाई दर बढ़कर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब 72 प्रतिशत की उछाल आया है. जिसके कारण वहां की जनता बेहाल है. उनके पास न नौकरी है और न रोटी है. ईरान सरकार पर लगाता दबाव बढ़ता जा रहा है. उधर अमेरिकी प्रतिबंधों, सरकारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार ने ईरान में हालात और गंभीर कर दिए हैं.
लोगों का सरकार से, खास तौर पर सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से भरोसा टूटता नजर आ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने ‘डेथ टू खामेनेई’ और ‘डेथ टू द डिक्टेटर’ जैसे नारे लगाए. 2022 के कड़े दमन के बाद से ही जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता गया है। 2024 में राष्ट्रपति पेजेशकियन सुधारों के वादे के साथ चुने गए थे, लेकिन वे इंटरनेट सेंसरशिप हटाने और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में असफल रहे.




