Saturday, January 10, 2026
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Iran Protest: ईरान में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, अब तक 45 लोगों की मौत, एयरपोर्ट से लेकर फोन-इंटरनेट तक बंद

ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ 12 दिनों से जारी प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं, जिनमें अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी तेहरान सहित 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे हैं। हालात बिगड़ने पर सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं

Iran Protest: ईरान में आर्थिक संकट के कारण 12 दिनों से चल रहा प्रदर्शन अब उग्र हो चला है. प्रदर्शन की आग राजधानी तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक फैल चुकी है. 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों के हजारों लोग सड़कों पर हैं. प्रदर्शन के बीच गुरुवार को हालात और ज्यादा बिगड़ गए. जिसके चलते खामनेई सरकार को इंटरनेट बंद करना पड़ा और फोन लाइन्स काट दी गई. इससे ईरान का पूरी दुनिया से संपर्क टूट गया है.

इंटरनेट और फोन सेवा बंद

दरअसल ईरान के निर्वासित युवराज के आह्वान पर तेहरान और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गुरुवार रात को देश में इंटरनेट और टेलीफोन लाइन काट दी गईं. इंटरनेट कंपनी ‘क्लाउडफ्लेयर’ और एक अन्य कंपनी ‘नेटब्लॉक्स’ ने इंटरनेट संपर्क टूटने की बात कही और दोनों ने इसके लिए ईरान सरकार के हस्तक्षेप का दावा किया.

प्रदर्शन में अब तक 45 की मौत

एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में चल रहे प्रदर्शन के चलते अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 8 नाबालिग भी शामिल हैं. एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया गया है और सेना को अलर्ट पर रखा गया है.

ईरान में प्रदर्शन की आखिर क्या है वजह ?

ईरान में जनता का आक्रोश आर्थिक समस्याओं को लेकर सीधे सुप्रीम लीडर के खिलाफ देखने को मिल रहा है. देश में महंगाई दर बढ़कर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब 72 प्रतिशत की उछाल आया है. जिसके कारण वहां की जनता बेहाल है. उनके पास न नौकरी है और न रोटी है. ईरान सरकार पर लगाता दबाव बढ़ता जा रहा है. उधर अमेरिकी प्रतिबंधों, सरकारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार ने ईरान में हालात और गंभीर कर दिए हैं.

लोगों का सरकार से, खास तौर पर सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से भरोसा टूटता नजर आ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने ‘डेथ टू खामेनेई’ और ‘डेथ टू द डिक्टेटर’ जैसे नारे लगाए. 2022 के कड़े दमन के बाद से ही जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता गया है। 2024 में राष्ट्रपति पेजेशकियन सुधारों के वादे के साथ चुने गए थे, लेकिन वे इंटरनेट सेंसरशिप हटाने और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में असफल रहे.

Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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