Iran US Israel War : दुबई। ईरान ने शुक्रवार को समूचे पश्चिम एशिया में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे कुवैत में समुद्री पानी को पेयजल में बदलने वाला एक विलवणीकरण संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया और एक रिफाइनरी में आग लग गई। वहीं, अमेरिका और इजराइल ने हवाई हमले कर तेहरान को निशाना बनाया। इस युद्ध को शुरू हुए लगभग पांच सप्ताह हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल ने कहा था कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने इज़राइल और अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर दबाव बनाए रखा है। इस बात के संकेत के तौर पर कि ईरान की धर्म-आधारित शासन व्यवस्था का एक हिस्सा बातचीत के लिए तैयार हो सकता है, देश के पूर्व शीर्ष राजनयिक ने एक प्रभावशाली अमेरिकी पत्रिका में संघर्ष को समाप्त करने का एक प्रस्ताव प्रकाशित किया है।
होर्मुज संकट से तेल बाजार में उथल-पुथल
खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर ईरान के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी मजबूत पकड़ ने शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल मचा दी है, तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है, और भोजन सहित कई बुनियादी चीज़ों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शांतिकाल में दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन का पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शुक्रवार को लिखा कि अब दोनों पक्षों की तकलीफ़ों को खत्म करने का समय आ गया है।
ज़रीफ़ पश्चिमी देशों के साथ बातचीत का लंबा अनुभव रखने वाले एक मंझे हुए राजनयिक हैं और ईरानी नेतृत्व के एक व्यावहारिक खेमे के करीब माने जाते हैं। उन्होंने ‘फॉरेन अफेयर्स’ पत्रिका में लिखा, ‘‘लंबे समय तक चलने वाली शत्रुता से कीमती जानें और अमूल्य संसाधन कहीं ज़्यादा बर्बाद होंगे, जबकि इससे मौजूदा गतिरोध में कोई वास्तविक बदलाव नहीं आएगा।’’ ज़रीफ़ ने ही विश्व शक्तियों के साथ ईरान के 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने लिखा, ‘‘ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव देना चाहिए, जिसके बदले में उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएं- यह एक ऐसा सौदा है जिसे वाशिंगटन पहले स्वीकार नहीं करता, लेकिन अब शायद मान ले।’’
ईरान ने कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया
तेहरान और वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत कर रहे थे, तभी 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने बमबारी शुरू कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब अमेरिका ने उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान हमला किया है। हमलों के क्रम में ईरान ने कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। युद्ध के दौरान इस प्रतिष्ठान को कई बार निशाना बनाया गया है। सरकारी स्वामित्व वाली कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि दमकलकर्मी कई जगहों पर लगी आग को बुझाने का काम कर रहे हैं। कुवैत ने यह भी कहा कि ईरान के हमले से एक विलवणीकरण संयंत्र को ‘‘काफी नुकसान’’ पहुंचा है। इस तरह के संयंत्र खाड़ी देशों के लिए अधिकांश पेयजल की आपूर्ति करते हैं, और इन्हें इस युद्ध में प्रमुखता से निशाना बनाया जा रहा है। इसके साथ ही बहरीन में भी सायरन बजने की आवाज सुनाई दी। वहीं, सऊदी अरब ने कहा कि उसने ईरान के कई ड्रोन नष्ट कर दिए। उधर संयुक्त अरब अमीरात में रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गईं; और इजराइल से भी मिसाइल हमलों की सूचना मिली।
कार्यकर्ताओं ने ईरान की राजधानी तेहरान और मध्य शहर इस्फ़हान के आसपास हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि किस चीज़ को निशाना बनाया गया। इससे, एक दिन पहले ईरान ने कहा था कि अमेरिका ने एक बड़े पुल पर हमला किया, जो अभी निर्माणाधीन था, और इस हमले में आठ लोगों की मौत हो गई। युद्ध के दौरान ईरान में 1,900 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। इज़राइल में 19 लोगों के मारे जाने की खबर है। खाड़ी देशों और कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में दो दर्जन से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए हैं। वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल के जमीनी अभियान में 1,300 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। इस दौरान 10 इजराइली सैनिक भी मारे गए हैं।



