Monday, April 6, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जयशंकर ने की ईरान, कतर और UAE से बातचीत, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा ?

Iran US Israel War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान, कतर और UAE के नेताओं से बातचीत की। इस दौरान क्षेत्रीय हालात, द्विपक्षीय संबंध और खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हुई। यह बातचीत ट्रंप की ईरान को दी गई चेतावनी के बाद बढ़े तनाव के बीच हुई।

Iran US Israel War: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से रविवार को बात की और उनसे पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की. विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की. ऐसा माना जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इस संघर्ष के असर के मुद्दे पर प्रमुखता से बातचीत की गई.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर विस्तार से जानकारी दिए बिना कहा, ‘ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया. मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई.’ नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा की.

ट्रंप की हालिया धमकी के बाद बातचीत

पश्चिम एशिया के इन तीन देशों के नेताओं के साथ जयशंकर की फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अल थानी के साथ जारी संघर्ष को लेकर आज शाम टेलीफोन पर बातचीत हुई.’उन्होंने कहा, ‘संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चर्चा की.’

ईरान ने अवरुद्ध किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

गौरतलब है कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान द्वारा अवरुद्ध किए जाने के बाद तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है. पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है. ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है.

भारत संघर्ष खत्म करने के लिए लगातार कर रहा कूटनीतिक प्रयास

भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास किए हैं. भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी नेताओं ने ट्रंप के बयान को बताया खतरनाक, बोले-‘राष्ट्रपति पागलपन की स्थिति में’


Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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