विशाखापत्तनम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को विशाखापत्तनम में स्वदेशी तकनीक से तैयार आधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’ को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे। यह कदम भारत के पूर्वी समुद्री तट के बढ़ते रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। पूर्वी नौसेना कमान के अनुसार, यह कार्यक्रम नौसैनिक डॉकयार्ड में वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में आयोजित किया जाएगा।
सिंह ने गुरुवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि वह इस अत्याधुनिक युद्धपोत को नौसेना के बेड़े में शामिल करने के लिए विशाखापत्तनम जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह शामिलीकरण भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और उसकी संचालन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत विकसित ‘तारागिरी’ चौथा युद्धपोत है, जिसका वजन करीब 6,670 टन है। इसका निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited, मुंबई द्वारा किया गया है, जो उन्नत डिजाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है। इसका ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि यह रडार की पकड़ में कम आता है, जिससे यह चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहता है।
करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री से निर्मित इस युद्धपोत के निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ है। इसमें डीजल और गैस आधारित संयुक्त प्रणोदन प्रणाली दी गई है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन में सक्षम बनाती है।
तारागिरी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और उन्नत पनडुब्बी रोधी प्रणाली शामिल हैं। ये सभी आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से जुड़े हैं, जिससे यह तेजी और सटीकता से किसी भी खतरे का मुकाबला कर सकता है।
यह युद्धपोत केवल युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। इसे नौसेना में शामिल किया जाना भारत के एक सशक्त, भरोसेमंद और आत्मनिर्भर समुद्री बल बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



