संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिण सूडान में बाढ़ से प्रभावित एक अहम आपूर्ति मार्ग को दोबारा चालू कराने में भारतीय शांति सैनिकों की भूमिका की सराहना की है और शांति अभियानों की अहमियत को फिर से उजागर किया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह उपलब्धि बेहद कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई है।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टेफ़ान डुजारिक ने प्रेस वार्ता में बताया कि दक्षिण सूडान से कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि यूएन मिशन दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत तैनात भारतीय इंजीनियरिंग यूनिट ने अपर नाइल प्रांत में मलाकाल-रेनक मार्ग के एक महत्वपूर्ण हिस्से को फिर से आवागमन के लिए खोल दिया है, जो पिछले साल आई भीषण बाढ़ के कारण बंद हो गया था।
यह मार्ग बहाल होने से राहत सामग्री, खाद्य आपूर्ति और दवाइयों की आवाजाही आसान हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। दुजारिक ने कहा कि यह कदम दिखाता है कि शांति मिशन किस तरह अस्थिर क्षेत्रों में जीवनरेखा साबित होते हैं और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।दक्षिण सूडान में पिछले वर्ष आई बाढ़ से व्यापक तबाही हुई थी। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वय कार्यालय के अनुसार, आठ राज्यों में करीब 13.5 लाख लोग प्रभावित हुए और लगभग 3.75 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।
जनवरी 2026 तक भारत यूएनएमआईएसएस में सबसे बड़ा सैनिक योगदान देने वाला देश बना हुआ है। इस मिशन में भारत के करीब 1,779 जवान तैनात हैं, जो लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा दे रहे हैं और वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा रहे हैं।



