Ashwini Vaishnaw on Indian Economy : दावोस। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि भारत आने वाले कुछ वर्ष में निश्चित रूप से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वहीं अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह 2028 या उससे भी पहले संभव है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के एक सत्र में यहां वैष्णव ने कहा कि चिंता का एकमात्र विषय अमीर देशों में कर्ज का पहाड़ और उनका भारत पर संभावित असर क्या होगा है। गोपीनाथ ने कहा कि भारत के लिए चुनौती तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना नहीं है बल्कि प्रति व्यक्ति आय को ऊंचे स्तर तक ले जाना है।
पिछले एक दशक में देश में परिवर्तनकारी बदलाव हुआ : अश्विनी वैष्णव
वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में परिवर्तनकारी बदलाव हुआ है जो सुविचारित, स्पष्ट रूप से परिभाषित और बेहतर क्रियान्वयन पर आधारित है। उन्होंने बताया कि यह चार स्तंभों भौतिक, डिजिटल एवं सामाजिक अवसंरचना में सार्वजनिक निवेश, समावेशी विकास, विनिर्माण एवं नवाचार और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर टिका है। वैष्णव ने कहा, इन सभी को प्रौद्योगिकी मंच के साथ जोड़कर हमने ऐसा ढांचा तैयार किया है जिससे अगले पांच वर्ष में भारत छह से आठ प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि, दो से चार प्रतिशत की महंगाई और 10-13 प्रतिशत की बाजार मूल्य आधारित वृद्धि हासिल करेगा। उन्होंने कहा, हमारे प्रधानमंत्री तथा सरकार की प्राथमिकता गरीबों की सुरक्षा है और इसी कारण 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।

भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में कोई संदेह नहीं : गोपीनाथ
वैष्णव ने हालांकि वैश्विक स्तर पर विकसित देशों के कर्ज को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि बड़े पैमाने पर बॉन्ड बाजारों में उथल-पुथल होती है तो उसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। गोपीनाथ ने कहा कि भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में कोई संदेह नहीं है और यह कुछ वर्षों की ही बात है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर है कि कोई बड़ी आपदा न हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा अनुमानों के आधार पर भारत 2028 तक यह मुकाम हासिल कर सकता है और यह इससे पहले भी हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों में संशोधन किस आधार पर होता है।
गोपीनाथ ने साथ ही कहा कि भारत में बड़े सुधार हुए हैं। भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना प्रभावशाली है और कर सुधार अहम रहे हैं। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को पाने के लिए प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और सुधारों की निरंतर गति बनाए रखना जरूरी है। गोपीनाथ ने भूमि अधिग्रहण, न्यायिक सुधार, श्रम बाजार की जटिलताओं और कौशल विकास को भारत की विकास यात्रा की प्रमुख चुनौतियां बताया। उद्योगपति सुनील भारती मित्तल ने कहा कि भारत एक मजबूत स्थिति में है और निश्चित रूप से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। व्यापार जगत को सक्षम माहौल, प्रतिबद्ध सरकार और स्थिरता की जरूरत होती है जो वर्तमान में उपलब्ध है। उन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा को एक बड़ी चुनौती बताया और कहा कि भारत को अपने घरेलू बाजार एवं व्यापार समझौतों के जरिेये वृद्धि के नए रास्ते तलाशने होंगे।
गोपीनाथ ने प्रदूषण को भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसका अर्थव्यवस्था और मानव जीवन पर भारी बोझ है और इससे युद्धस्तर पर निपटना जरूरी है। अमेरिका के ऊंचे शुल्कों के भारत की वृद्धि पर असर से जुड़े सवाल पर वैष्णव ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत वृहत आर्थिक एवं सूक्ष्म आर्थिक बुनियाद पर टिकी है जिससे वह इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादक नए बाजार तलाश रहे हैं और निर्यात में वृद्धि हुई है।




