Saturday, January 17, 2026
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‘भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं’, संघ प्रमुख Mohan Bhagwat बोले-‘अगर यहां कुछ भी होता है, तो इसके बारे में हिंदुओं से पूछा जाएगा’

मोहन भागवत ने छत्रपति संभाजीनगर के हिंदू सम्मेलन में कहा कि भारत केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक चरित्र है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ भी अच्छा-बुरा होने पर हिंदुओं से पूछा जाएगा। भागवत ने हिंदू समाज को समावेशी बताते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद सद्भाव बना रहा है। शक्ति में केवल सैन्य बल नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धांत और नैतिक मूल्य भी शामिल हैं।

Mohan Bhagwat News: छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत में कुछ भी अच्छा या बुरा घटित हो, तो हिंदुओं से इसके बारे में पूछा जाएगा, क्योंकि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि देश का चरित्र है.’ भागवत ने कहा कि हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और सभी को स्वीकार करने वाला रहा है जो रीति-रिवाजों, पहनावे, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति में विविधता को अपनाता है और इन मतभेदों को संघर्ष का कारण नहीं बनने देता.

भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं: भागवत

भागवत ने कहा, ‘अगर भारत में कुछ अच्छा या बुरा होता है, तो हिंदुओं से पूछा जाएगा. भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि देश का चरित्र है. जो लोग एकीकरण और सद्भावपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, वे हिंदू समाज और देश के सच्चे चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह परंपरा सदियों से आक्रमणों और विनाश के बावजूद संरक्षित रही है. ऐसे लोग हिंदू कहलाते हैं और उनकी भूमि भारत कहलाती है. यदि लोग अच्छे, दृढ़ और ईमानदार बनने का प्रयास करें, तो देश भी वैश्विक मंच पर इन गुणों को प्रदर्शित करेगा. विश्व भारत से कुछ अपेक्षा रखता है और पर्याप्त शक्ति एवं प्रभाव होने पर देश सार्थक योगदान देने में सक्षम होगा.भागवत ने कहा कि शक्ति में केवल सशस्त्र बल ही नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धांत और नैतिक मूल्य भी शामिल होते हैं.

हम वैश्विक परिवार की अपेक्षा रखते हैं: भागवत

भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा, ‘हमें स्थानीय वस्तुएं खरीदनी चाहिए. जो चीज यहां नहीं बन सकती, उसे अन्य देशों से खरीदा जा सकता है. भारतीय नीति निर्माता अंतरराष्ट्रीय व्यापार कर रहे हैं, लेकिन किसी के दबाव में नहीं. हमने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना है और हमें इसी मार्ग पर चलना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘हमें विदेशों में रोजगार सृजन की चिंता नहीं करनी चाहिए, यह उन्हें करना है. जब वैश्वीकरण की बात करते हैं, तो वे वैश्विक बाजार की अपेक्षा रखते हैं, हम वैश्विक परिवार की अपेक्षा रखते हैं.’

हिंदुओं में एकता का किया आह्वान

भागवत ने हिंदुओं में एकता का आह्वान किया और कहा कि यह केवल RSS का उद्देश्य नहीं, बल्कि समुदाय के सभी सदस्यों का लक्ष्य होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हमें जाति, संप्रदाय, भाषा या व्यवसाय की परवाह किए बिना हिंदू मित्र बनाने चाहिए. इससे समानता स्थापित होगी. संघ पहल करेगा, लेकिन समुदाय को इसका नेतृत्व करना होगा. उन्होंने कहा, ‘भगवान राम ने भी रावण से बातचीत के जरिए युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में हथियार उठाए. हमें भी अन्याय के खिलाफ कदम-दर-कदम लड़ना चाहिए.’

‘युवाओं का योगदान देश की प्रगति और भविष्य निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण’

RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा सम्मेलन में भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए विदेश जाएं, लेकिन इसे भारत के विकास में उपयोग करें. उन्होंने कहा, युवाओं का योगदान देश की प्रगति और भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है.’

भागवत ने कहा, ‘संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है. इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है.’ उन्होंने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की.’

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Premanshu Chaturvedi
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