Saturday, February 7, 2026
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भारत, अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमत, भारत के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुला : पीयूष गोयल

India US Trade Deal : नई दिल्ली/वाशिंगटन। भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं। दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है।

इंडिया-यूएस ट्रेड डील से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा, किसानों को नए मौके

बयान के मुताबिक, ‘‘अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।’’ इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है। ट्रंप ने कहा कि भारत ने इस दिशा में कई ‘महत्वपूर्ण कदम’ उठाए हैं। भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। आदेश में कहा गया है, “सात फरवरी, 2026 को स्थानीय समयानुसार रात 12:01 बजे या उसके बाद उपभोग के लिए आयातित या गोदाम से उपभोग के लिए निकाले गए उत्पादों के संबंध में, अमेरिका में आयातित भारतीय उत्पादों पर कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य-आधारित शुल्क लागू नहीं होंगे।” इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौता किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करेगा और महिलाओं एवं युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। इसका कारण भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क पहले के 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। यह पहले से लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क के अलावा था। इस वजह से भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया था। इससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ था, क्योंकि अमेरिका उनका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ को और बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क 18% हुआ : गोयल

भारत को विमान कलपुर्जों पर धारा 232 के तहत छूट, वाहन कलपुर्जों पर शुल्क दर कोटा और जेनेरिक दवाइयों पर बातचीत के माध्यम से प्राप्त लाभ भी मिलेंगे, जिससे इन क्षेत्रों में निर्यात में मजबूत वृद्धि होगी। गोयल ने कहा, ‘साथ ही, यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू कुछ सब्जियां, मांस आदि जैसे संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित किया गया है।’ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के साथ व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं।

यूएसटीआर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक पहुंच बढ़ा रहे हैं। भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क को समाप्त करने या कम करने, व्यापार में लंबे समय से चली आ रही गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने, अधिक अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने और 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है।” इस समझौते की सराहना करते हुए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि दूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘समझौते अंजाम देने’ से अमेरिकी श्रमिकों और उत्पादकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के द्वार खुल रहे हैं। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देश इस रूपरेखा को ‘शीघ्र’ लागू करेंगे और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को निष्कर्ष पर पहुंचाने के उद्देश्य से अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे।

समझौते के तहत भारत कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क उसी दिन खत्म कर देगा, जिस दिन यह समझौता लागू होगा। अन्य उत्पादों पर शुल्क को समय के साथ चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है। कुछ क्षेत्रों में शुल्कों में कटौती की जाएगी, जबकि अन्य में कोटा आधारित रियायतें दी जाएंगी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा, ”इससे मिलने वाली शुल्क छूट और बाजार तक बेहतर पहुंच से भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलेगी। इससे भारत दुनिया भर में सबसे भरोसेमंद आपूर्ति केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित होगा।” भारत और अमेरिका ‘ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट’ (जीपीयू) और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे। पिछले साल फरवरी में, दोनों देशों ने बीटीए के पहले चरण के लिए बातचीत शुरू की थी। इस रूपरेखा को अब एक कानूनी समझौते में परिवर्तित किया जाएगा, जिस पर मार्च के मध्य तक इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। उसके बाद भारत निर्दिष्ट अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क कम करना शुरू कर देगा। अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद, जेनेरिक दवाइयों, रत्न और हीरों, तथा कुछ विमानों और विमान कलपुर्जों सहित भारतीय वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क शून्य हो जाएगा।

बयान के अनुसार, “अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों को समाप्त करने को लेकर लगाए गए शुल्क के तहत वाहन कलपुर्जों के लिए तरजीही शुल्क दर कोटा प्राप्त होगा।’’ इसमें कहा गया कि भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा, भारत ने आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने पर सहमति जताई है, जिससे बाज़ार में पहुंच में देरी होती है या ये अमेरिका के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाती हैं। बयान के अनुसार, “दीर्घकालीन चिंताओं के समाधान के लिए मिलकर काम करने के महत्व को समझते हुए, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों के व्यापार में दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत है।’’

भारत और अमेरिका ‘ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट’ (जीपीयू) और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों में व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार करेंगे। दोनों देशों ने लागू तकनीकी विनियमनों के अनुपालन को सुगम बनाने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों के लिए अपने-अपने मानकों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करने की योजना बनाई है। अमेरिका 2021-25 के दौरान भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है। 2024-25 में, द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर (86.5 अरब डॉलर निर्यात और 45.3 अरब डॉलर आयात) तक पहुंच गया। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 2024-25 में 41 अरब डॉलर था। यह 2023-24 में 35.32 अरब डॉलर और 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर था।

Mukesh Kumar
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