IND vs NZ, T20 World Cup Final: मोटेरा में फिर से नीले रंग की लहर लौट आई है जो धीरे-धीरे विशाल नरेन्द्र मोदी स्टेडियम की ओर बढ़ रही है जहां भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 विश्व कप का खिताबी मुकाबला होने वाला है. लेकिन नीले रंग की भारतीय जर्सी पहने और तिरंगे लिए बढ़ती भीड़ के बीच न्यूजीलैंड की टीम के एक खिलाड़ी ने चुपचाप हकीकत स्वीकार की. न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर ने भारतीय टीम से भिड़ने से पहले अपने देश के प्रशंसकों को एक भावुक संदेश दिया. उन्होंने ‘एक्स’ पर न्यूजीलैंड के प्रशंसकों के लिए संदेश में कहा, ‘मैं बड़े भाषण देने या जोश भरी अपील करने वालों में से नहीं हूं. लेकिन यह कहना ठीक है कि यहां 1.4 अरब टीम इंडिया के प्रशंसक और बाकी सब के सामने हम थोड़े कम हैं. लेकिन कोई बात नहीं, क्योंकि हमें पता है कि घर पर आप हमारा समर्थन कर रहे होंगे.’
माहौल 2023 से बिलकुल अलग
सैंटनर जानते हैं कि रविवार रात उनकी टीम का सामना किस माहौल से होगा. स्टेडियम के आसपास का माहौल 19 नवंबर 2023 से बिल्कुल अलग है, जब टी20 विश्व कप फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था जिसमें मेजबान टीम हार गई थी. तब अहमदाबाद में दोपहर 1 बजे शुरू होने वाले मैच के लिए असामान्य रूप से बहुत जल्दी सुबह 8 बजे से ही शहर में घबराहट और उत्सुकता का माहौल था. इस बार फाइनल शाम 7 बजे शुरू होगा और भीड़ भी दोपहर से ही स्टेडियम की ओर आने लगी जिससे माहौल ज्यादा आरामदायक और लगभग उत्सव जैसा लग रहा है. पिछले फाइनल की तुलना में एक और मामूली अंतर भी है. उस दिन कई प्रशंसकों के मन में चिंता की झलक थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस, जोश हेजलवुड और मिचेल स्टार्क की तेज गेंदबाज़ी तिकड़ी बेहद खतरनाक मानी जाती थी.
भारत के समर्थक मान रहे परिणाम लगभग तय
लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग दिखाई देता है. ज्यादातर समर्थक मान रहे हैं कि परिणाम लगभग तय है जो भारत की जीत है और वो भी शायद आराम से. इसका एक कारण पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का साहस और आत्मविश्वास से भरा शानदार प्रदर्शन भी है. दूसरा कारण प्रतिद्वंद्वी टीम भी है. अपनी प्रतिस्पर्धी परंपरा के बावजूद न्यूजीलैंड एक ऐसी टीम है जिसे भारतीय प्रशंसक लंबे समय से सम्मान देते हैं, लेकिन उनसे डरते नहीं हैं. न्यूजीलैंड का सम्मान जरूर होता है लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसी डर पैदा करने वाली छवि उनके पास नहीं है. स्टेडियम की ओर जाने वालों में तरुण और गौतम भी शामिल थे जो बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले 20-25 साल के पेशेवर हैं. उन्होंने फाइनल देखने के लिए मैच टिकट और होटल दोनों के लिए काफी बड़ी कीमत खर्च की है. उनमें से एक ने कहा, यह जिंदगी में एक बार मिलने वाला अनुभव है.’
सैंटर ने न्यूजीलैंड के समर्थकों से कही ये बात
हालांकि हर वह व्यक्ति जो यहां आना चाहता था, नहीं आ सका. ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण दुबई का हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद होने से कई NRI के यात्रा कार्यक्रम बिगड़ गए जिससे स्टैंड में विदेशों से आने वाले भारतीयों की संख्या कम हो गई. जहां तक न्यूजीलैंड के प्रशंसकों की बात है तो स्टैंड में शायद ही कोई काली जर्सी दिखाई दे. लेकिन वे सोमवार सुबह न्यूजीलैंड समयानुसार 2:30 बजे अपने टीवी सेट के सामने जरूर होंगे. सैंटनर ने ‘एक्स’ पर पारंपरिक माओरी शैली में प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए लिखा, ‘किया ओरा आओतेआरोआ’’ जिसका मतलब है ‘‘हैलो न्यूजीलैंड.’ उन्होंने लिखा, ‘हमें पता है कि मैच सोमवार सुबह बहुत जल्दी शुरू होगा. लेकिन अलार्म लगाइए और एक बार फिर हमारा समर्थन कीजिए. और अगर आप स्कूल के लिए थोड़े लेट हो जाएं तो मेरा संदेश अपने बॉस या शिक्षक तक पहुंचा देना.’ कप्तान ने उम्मीद जताते हुए संदेश समाप्त किया कि टीम ‘कुछ अतिरिक्त सामान के साथ जल्द घर लौटेगी.’ माओरी भाषा में ‘आओतेआरोआ’ का अर्थ है सफेद बादलों की धरती. भारत यही उम्मीद करेगा कि मोटेरा के ऊपर छाए बादल मेहमान टीम के लिए काले साबित हों.
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