Friday, February 27, 2026
HomePush Notificationबेहतर निगरानी से ही रुकेगा गैस दुरुपयोग, जिम्मेदार कब जागेंगे ?

बेहतर निगरानी से ही रुकेगा गैस दुरुपयोग, जिम्मेदार कब जागेंगे ?

अवैध गैस रिफिलिंग रुक नहीं रही है। घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी जारी है। आलम यह है कि होटल-रेस्टोरेंट से लेकर मिठाई हो या चाय की दुकान-थड़ी, अधिकांश में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है। कभी-कभार की कार्रवाई से यह नहीं रुक पा रहा।

प्रतीक चौवे, संपादक

अवैध गैस रिफिलिंग रुक नहीं रही है। घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी जारी है। आलम यह है कि होटल-रेस्टोरेंट से लेकर मिठाई हो या चाय की दुकान-थड़ी, अधिकांश में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है। कभी-कभार की कार्रवाई से यह नहीं रुक पा रहा। गुरुवार को जिला कलेक्टर डॉ जितेंद्र सोनी के निर्देश पर हुई कार्रवाई में 77 सिलेंडर जब्त किए गए। प्रताप नगर-DCM इलाके में रेस्टोरेंट-मिठाई की दुकान-ढाबों पर यह कार्रवाई हुई। असल में इन गिनी चुनी कार्रवाई से यह अवैध धंधा खत्म नहीं होने वाला। वो भी इसलिए कि संबंधित विभाग ठीक ढंग से कार्रवाई कर ही नहीं रहे। जिम्मेदारी रसद विभाग की है, पता नहीं क्या व्यवस्था है कि खुलेआम चल रहे इस गोरखधंधे को ठीक ढंग से रोकने की कोशिश ही नहीं की जा रही। अवैध गैस रिफिलिंग और सिलेंडर भंडारण का गोरखधंधा प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में बेखौफ चल रहा है। समय-समय पर छापेमारी होती है, सिलेंडर जब्त होते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह खतरनाक कारोबार फिर पटरी पर लौट आता है। यह स्थिति केवल कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।

हैरानी की बात यह है कि यह गोरखधंधा छिपकर नहीं, बल्कि कई जगहों पर खुलेआम चलता है। तंग बस्तियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के गैस की अवैध रिफिलिंग की जाती है। मामूली चिंगारी भी बड़े हादसे में बदल सकती है, फिर भी जोखिम भरे इस कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं दिखता। मौसमी छापेमारी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन पा रही। कुछ दिनों की सख्ती के बाद निगरानी ढीली पड़ते ही अवैध कारोबारी फिर सक्रिय हो जाते हैं। असल चिंता यह है कि कार्रवाई “संख्या” में तो दिखती है, लेकिन “नतीजे” में नहीं। यदि हर साल इतने मामले पकड़े जा रहे हैं, तो फिर अवैध रिफिलिंग बार-बार उसी तेजी से कैसे लौट आती है? इसका सीधा अर्थ है कि या तो कार्रवाई सतही है, या फिर दोषियों को ऐसी सजा नहीं मिल रही जो दूसरों के लिए नजीर बने। कई बार ऐसे मामलों को गंभीर अपराध की बजाय नियमित उल्लंघन मानकर निपटा दिया जाता है। नतीजन कार्रवाई का दबाव उतना मजबूत नहीं बनता, जितना होना चाहिए।

अवैध गैस रिफिलिंग या भंडारण जैसे मामलों में खाद्य एवं आपूर्ति, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन-सभी की भूमिका होती है। लेकिन अक्सर कार्रवाई बिखरी हुई और अलग-अलग होती है। संयुक्त और नियमित अभियान के अभाव में अवैध नेटवर्क बच निकलते हैं। यह भी सही है कि कई जगह निरीक्षण स्टाफ सीमित है, तकनीकी साधन पुराने हैं और डेटा आधारित ट्रैकिंग का अभाव है। ऐसे में अवैध गतिविधियां पकड़ में आने से पहले ही स्थान बदल लेती हैं। आधुनिक तकनीक और निरंतर फील्ड इंटेलिजेंस के बिना प्रभावी नियंत्रण मुश्किल है। जब अवैध भंडारण लंबे समय तक खुलेआम चलता रहता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगरानी क्यों नहीं हुई। पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय किए बिना व्यवस्था पर भरोसा मजबूत भी नहीं हो सकता। निरंतर संयुक्त कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था, तकनीक आधारित ट्रैकिंग और कठोर दंड का वास्तविक क्रियान्वयन। साथ ही शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया जरूरी है, ताकि सूचना देने वाले सामने आ सकें। इस अवैध कार्य से जुड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई हो तो जिला रसद समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी तलब किया जाना चाहिए। यह भी सवाल है कि सख्ती के दावों के बीच यह गैस माफिया पनप कैसे रहा है‌? सब्सिडी पर मिलने वाले सिलेंडरों की काला बाजारी पर कौन रोक लगाएगा।

Prateek Chauvey
Prateek Chauveyhttps://jagoindiajago.news/
माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular