Manoj Kumar: देशभक्ति पर आधारित ‘शहीद’, ‘उपकार’ एवं ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी लोकप्रिय फिल्मों में अभिनय के बाद ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर- दिग्गज अभिनेता एवं फिल्मकार मनोज कुमार का शुक्रवार को तड़के मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. मनोज कुमार के पारिवारिक मित्र और फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने बताया कि कुमार पिछले कुछ समय से बीमार थे और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण उनका कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में तड़के करीब 3.30 बजे निधन हो गया.
मनोज कुमार के बेटे ने कही ये बात
मनोज कुमार के बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से पीड़ित थे और पिछले कुछ साल से बिस्तर पर थे. उन्होंने कहा, ”उन्हें पीड़ा से मुक्ति मिल गई. गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता को पिछले कुछ समय में कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था और हाल में उन्हें निमोनिया के कारण भर्ती कराया गया था.
हरिकृष्ण गोस्वामी था नाम
फिल्म जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित कुमार को ‘दो बदन’, ‘हरियाली और रास्ता’ तथा ‘गुमनाम’ जैसी सफल फिल्मों के लिए भी जाना जाता था. अविभाजित भारत के एबटाबाद शहर (अब पाकिस्तान) में एक पंजाबी हिंदू परिवार में जन्मे कुमार का जन्म का नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था. उनका परिवार बाद में दिल्ली आ गया और कुमार ने हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह फिल्मों में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गए.
क्यों रखा मनोज कुमार नाम ?
कुमार ने 2021 में पीटीआई-भाषा से एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्हें ‘शबनम’ फिल्म में दिलीप कुमार द्वारा निभाया गया मनोज का किरदार इतना पसंद आया था कि उन्होंने अपना नाम बदलकर मनोज रखने का फैसला कर लिया. उन्होंने कहा, ”मुझे वह समय याद है जब मैं 1949 में रिलीज हुई फिल्म ‘शबनम’ में दिलीप कुमार साहब को देखने गया था. उनकी वजह से ही मैं सिनेमा का प्रशंसक बना. मुझे फिल्म में उनके किरदार से प्यार हो गया था. इस किरदार का नाम मनोज था. उस समय मेरी उम्र 11 साल रही होगी लेकिन मैंने तुरंत फैसला कर लिया कि अगर मैं कभी अभिनेता बना तो अपना नाम मनोज कुमार ही रखूंगा.” उसके कई साल बाद दिलीप कुमार ने मनोज कुमार की फिल्म ‘क्रांति’ में भूमिका निभाने के लिए हामी भरी. कुमार ने कहा कि दिलीप कुमार के ‘क्रांति’ में अभिनय के लिए हामी भरने से उन्हें बहुत खुशी हुई थी.
मनोज कुमार का फिल्मी करियर
मनोज कुमार को पहली बड़ी सफलता 1962 में रिलीज हुई फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’ से मिली जिसमें माला सिन्हा अभिनेत्री थीं. इसके बाद ‘वो कौन थी?’ को भी भारी सफलता मिली और उसका गीत ‘लग जा गले’ बहुत लोकप्रिय हुआ. उनकी 1965 में भगत सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म ‘शहीद’ रिलीज हुई जो काफी सफल रही और इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी ध्यान खींचा था.
शास्त्री के साथ बातचीत के दौरान कुमार के मन में उनके लोकप्रिय नारे ‘जय जवान, जय किसान’ से प्रेरणा लेकर फिल्म बनाने का विचार आया जिसके बाद उन्होंने ‘उपकार’ फिल्म बनाई. यह उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी. यह फिल्म बेहद सफल रही और इसका गीत ‘मेरे देश की धरती’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ.
देशभक्ति के अलावा इन फिल्मों में निभाए किरदार
देशभक्ति से भरपूर फिल्मों के अलावा कुमार ने ‘हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘सावन की घटा’ और ‘गुमनाम’ जैसी फिल्मों में रोमांटिक किरदार भी निभाए. उन्होंने पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक अंतर के विषय पर 1970 में ‘पूरब और पश्चिम’ फिल्म बनाई. इस फिल्म ने भी बड़ी सफलता हासिल की. देशभक्ति और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के प्रति उनके झुकाव के कारण वह ‘भारत कुमार’ के नाम से लोकप्रिय हुए. उनकी सफल फिल्में ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तथा ‘क्रांति’ भी इन्हीं विषयों पर आधारित थीं.
इस खबर को भी पढ़ें: Stock Market Today: रेड जोन में खुला शेयर बाजार, Sensex 591 अंक फिसला, निफ्टी 23,047 पर, जानें किन स्टॉक्स में फायदा और किन में नुकसान ?