Sunday, March 1, 2026
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Holi 2026: केमिकल युक्त रंग-गुलाल होली की मस्ती में डाल सकते हैं खलल, त्वचा या श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

Holi पर केमिकल युक्त रंग-गुलाल से त्वचा, आंख और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें मौजूद हानिकारक रसायन एलर्जी, जलन, सूजन, डर्मेटाइटिस व एक्जिमा बढ़ा सकते हैं। पहले से बीमार लोगों को खास सावधानी रखनी चाहिए और सुरक्षित रहने के लिए प्राकृतिक, ऑर्गेनिक व हर्बल रंगों का उपयोग बेहतर माना गया है।

रिपोर्टर: मनोज अवस्थी

Holi 2026: जयपुर। रंगों का पर्व होली आपसी प्रेम,सौहार्द और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गिले-शिकवे भूलते हैं और नई शुरुआत का संकल्प लेते हैं। लेकिन बाजार में बिक रहे केमिकल युक्त रंग इस खुशी में खलल डाल सकते हैं। जिसके चलते चिकित्सक महेश सिंह ने सलाह दी है कि रासायनिक रंग-गुलाल से त्वचा,आंख और सांस संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में होली पर प्राकृतिक,ऑर्गेनिक और हर्बल रंगों का उपयोग करना ही समझदारी है।

डॉक्टर सिंह ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों में लेड ऑक्साइड, क्रोमियम, कॉपर सल्फेट और अन्य हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा पर लाल चकत्ते,खुजली,जलन, सूजन और एलर्जी का कारण बनते हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में डर्मेटाइटिस और एक्जिमा की समस्या बढ़ सकती है। कई बार रंगों के दुष्प्रभाव लंबे समय तक बने रहते हैं और उपचार की आवश्यकता पड़ती है।

बाल और स्कैल्प पर असर

रासायनिक रंग बालों की प्राकृतिक नमी को खत्म कर देते हैं। इससे बाल रूखे, बेजान और कमजोर होकर टूटने लगते हैं। स्कैल्प में खुजली, डैंड्रफ और फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। रंग खेलने से पहले बालों में तेल लगाने और सिर को ढकने की सलाह दी गई है।

आंख और सांस के मरीज विशेष सतर्क रहें

सूखे रंगों की महीन परत सांस के साथ अंदर जाने पर अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। आंखों में रंग जाने से जलन, लालिमा, सूजन और कंजक्टिवाइटिस (आई फ्लू) का खतरा रहता है। गंभीर मामलों में कॉर्निया को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सलाह दी कि यदि रंग आंख में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोएं और समस्या होने पर चिकित्सक से संपर्क करें। डॉक्टर सिंह ने कहा कि बच्चों की त्वचा और आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं। उन्हें केवल प्राकृतिक और हर्बल रंगों से ही होली खेलने दें। बुजुर्ग और पहले से त्वचा या श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित लोग भी विशेष सावधानी बरतें।

वॉटर बैलून से गंभीर चोट का खतरा

होली के दौरान पानी से भरे गुब्बारे फेंकना खतरनाक हो सकता है। तेज गति से फेंका गया गुब्बारा आंख, कान या चेहरे पर लगने से गंभीर चोट पहुंचा सकता है। इससे कॉर्निया डैमेज, कान के पर्दे पर असर, नाक से खून आना और सिर में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह विशेष रूप से जोखिम भरा है, क्योंकि अचानक गुब्बारा लगने से संतुलन बिगड़कर दुर्घटना हो सकती है।

सुरक्षित होली के लिए दिए सुझाव

डॉक्टर सिंह ने बताया कि केवल हर्बल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें। रंग खेलने से पहले त्वचा पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहन सकते हैं। अधिक पानी की बर्बादी से बचें और स्वच्छ पानी का ही उपयोग करें। किसी पर जबरदस्ती रंग न डालें। डॉ. सिंह ने अपील की है कि होली उत्साह और उमंग के साथ मनाएं, लेकिन स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। प्राकृतिक रंगों के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में खुशियों से भरी और सुरक्षित होगी।

Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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