Wednesday, February 25, 2026
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Holi 2026 : भद्रा और चंद्र ग्रहण का योग, होली पर रहेगी भद्रा भूलोक और सिंह राशि में, 3 मार्च को शाम 6 बजे बाद दिखेगा ब्लड मून

इस वर्ष होली पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 2 मार्च की रात भद्रा काल में प्रदोष समय होलिका दहन होगा, जबकि 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण दोपहर 3:19 से शाम 6:47 बजे तक रहेगा और 17 मिनट पूर्ण खग्रास स्थिति बनेगी।

Holi 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है। 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा।

Holika Dahan Date and Timing: कब जलेगी होलिका

ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं। सूतक काल के दौरान आमतौर पर शुभ कार्यों पर रोक मानी जाती है।

Bhadra Kaal Timing: जानें कब से कब तक रहेगा भद्रा

ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल विद्रोही के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। इस वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा।

Holika Pujan Significance: फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व

ज्योतिषाचार्य पंडित ने बताया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है। भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है।

Grahan Kaal Me Kya Karein: साधना और मंत्र जाप का लाभ

ग्रहण काल साधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान इष्ट देव या गुरु मंत्र की माला जाप करने से मंत्र सिद्धि का लाभ मिलता है।

पंचांग देखकर भद्रा काल से बचने की परंपरा

ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल विद्रोही के अनुसार भद्रा हिंदू पंचांग में वर्णित एक विशेष अशुभ काल है। इसे विष्टिकरण भी कहा जाता है। जब पंचांग में भद्रा लगती है, तब इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। भद्रा चंद्रमा की विशेष स्थिति में लगने वाला समय होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा शनिदेव की बहन मानी जाती हैं और इसका स्वभाव उग्र बताया गया है। शुक्ल या कृष्ण पक्ष की कुछ तिथियों में भद्रा का समय कभी दिन में, कभी रात में पड़ता है। दिन की भद्रा अधिक अशुभ मानी जाती है, जबकि रात की भद्रा कुछ कार्यों में दोषपूर्ण नहीं मानी जाती। पुराणों में उल्लेख है कि भद्रा जब पृथ्वी पर होती है, तब शुभ कार्यों में बाधा आती है। पंचांग देखकर भद्रा काल से बचने की परंपरा रही है।

17 मिनट तक पूर्ण खग्रास की स्थिति

ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल विद्रोही के अनुसार धुलंडी के दिन 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह उदित चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें लगभग 17 मिनट तक पूर्ण खग्रास स्थिति बनी रहेगी। इस दौरान शाम 6 बजे बाद चंद्रमा लाल रंग का दिखेगा। खगोलीय भाषा में इसे ब्लड मून कहा जाता है।

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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