रिपोर्टर: मनीष कुमार शर्मा
जयपुर। किक्रेट का T20 मेंस वर्ल्डकप टूर्नामेंट चल रहा है…और हर किसी की नजर दुनियाभर की टीमों के बैटिंग प्लेयर्स पर टिकी हुई है, जो ताबड़तोड़ बैटिंग के जरिये दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। यहां बेहद खास रोल निभाता है खिलाड़ी का बल्ला(बैट), जिसे मैच से पहले खिलाड़ी यदि कोई कमी हो तो अपनी जरूरत के अनुसार सही करवाता है। बैटिंग प्लेयर्स की यही जरूरत खिलाड़ियों को जयपुर के घनश्याम (कान्हा) की याद दिलाती है, जो बल्ले को सही आकार देकर उन्हें मैच के लिए परफेक्ट बनाने में माहिर हैं। इसकी बानगी है कि T20 मेंस वर्ल्डकप की इंडिया टीम में शामिल अधिकांश प्लेयर्स के बल्ले घनश्याम ने संवारे हैं। यही कारण है कि उनकी पहचान अब बैट सर्जन के रूप में बन चुकी है।

दरअसल, क्रिकेट के खेल में सिर्फ खिलाड़ी की फिटनेस या तकनीक ही नहीं, बल्कि इक्विपमेंट भी मैच का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में जब बल्लों को संवारने की बात आती है तो जयपुर के घनश्याम को याद किया जाता है। जयपुर में होने वाले कोई भी क्रिकेट मैच में शामिल होने जब खिलाड़ी आते हैं तो उन्हें प्लयर्स के बल्लों को सही आकार देने का मौका मिलता है। मूल रूप से भीलवाड़ा के गांव भटेड़ा के रहने वाले घनश्याम तेली जयपुर में एक छोटे से किराए के घर में रहकर ना केवल टीम इंडिया, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय दिग्गज बल्लेबाजों के बल्लों को संवारने का काम करते रहे हैं। वे बल्लेबाजों के बल्लों की ऐसी सर्जरी करते हैं कि इससे उनका बैलेंस, स्वीट स्पॉट और पावर हिटिंग क्षमता बेहतर हो जाती है। घनश्याम ने बताया कि करीब 20 सालों से उनके यहां बल्ले की ग्रिप, एज, वजन और प्रेसिंग पर बारीकी से काम किया जाता है, ताकि बल्लेबाज को मैदान पर बल्ले के साथ ज्यादा आत्मविश्वास मिल सके। घनश्याम ने बताया कि जब भी जयपुर में आईपीएल या कोई अन्य मैच होता है तो उन्हें खिलाड़ियों के बल्लों को जरूरत के अनुसार सही आकार देने का काम मिलता है।
कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कर चुके हैं तारीफ
घनश्याम का कहना है कि कुछ महीने पहले ही विजय हजारे ट्रॉफी में शामिल होने के लिए भारतीय टीम के कई खिलाड़ी जयपुर आए थे। इस दौरान शुभमन गिल, सूर्य कुमार यादव और अभिषेक शर्मा से उनकी मुलाकात हुई। घनश्याम ने बताया कि अभिषेक शर्मा ने अपने बल्ले में कुछ जरूरी बदलाव उन्हीं से करवाए थे, जिसके बाद उन्होंने उनके काम की तारीफ करते हुए कहा कि ‘वाह पाजी, मजा आ गया’। आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मार्कस स्टोइनिस के बल्ले को उनकी जरूरत अनुसार तैयार किया तो उन्होंने कहा कि ‘इट्स अमेजिंग, ब्रिलियंट और वंडरफुल’। स्टोइनिस उनके काम से इतने खुश हुए कि उन्होंने करीब 10 मिनट उनसे बातचीत की और अपने 4 बल्ले और संवारने को दिए। इसके अलावा इंग्लैण्ड के जो रूट को जब बल्ले के हैंडल में दिक्कत हुई तो उन्होंने अपने साथियों से घनश्याम के बारे में पूछा। घनश्याम कहते हैं कि बल्ला देने से पहले उन्होंने उनसे ही 4 बार पूछा, लेकिन जब उनके बैट का काम किया तो वो भी काफी खुश दिखे।

अब तक इन खिलाड़ियों के बल्ले संवारे
घनश्याम ने बताया कि T20 वर्ल्डकप की इंडिया टीम प्लेयर्स की बात करें तो सूर्यकुमार यादव, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, संजु सैमसन, ईशान किशन, हार्दिक पांड्या, यशस्वी जयसवाल, रिंकू सिंह के बल्लों के लिए काम कर चुके हैं। इसके अलावा शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर, रवि बिश्नोई, जितेश शर्मा, रियान पराग, शिवम दुबे, एमएस धोनी, रोहित शर्मा, रितुराज गायकवाड, सरफराज खान, ध्रुव जुरैल, प्रियांश आर्य, शशांक सिंह, प्रभ सिमरन सिंह, रमनदीप सिंह, मनदीप सिंह, दीपक हुड्डा, अजिंक्य रहाणे, रविन्द्र जडेजा, दीपक चाहर, जो रूट, जोस बटलर, डी कॉक, सिमरन हैटमायर, निकोलस पूरन, हसरंगा, महीश थिकसाना, मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस सहित कई इंटरनेशन क्रिकेट खिलाड़ियों के बैट का जरूरत अनुसार आकार दे चुके हैं।
बनना चाहते थे क्रिकेटर, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी ने बदला मन
घनश्याम ने बताया कि वर्ष 2005 में पढ़ाई के लिए जयपुर आया। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी तो दोस्तों चंद्रकांत और कमलेश ने हौसला बढ़ाया, जिसके बाद क्रिकेट अकेडमी में ही काम करने लगा। यहां जब क्रिकेट का महसूस किया तो क्रिकेटर बनने की सोची, लेकिन पैसों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ सका। फिर अम्पायरिंग और पिच क्यूरेटर का काम किया। धीरे-धीरे बल्लों की बनावट की समझ होने लगी तो बैट्स को आकार देने लगा। उन्होंने बताया कि बड़े क्रिकेट प्लेयर्स को उनका काम पसंद आने लगा तो वे अन्य प्लेयर्स को भी बताने लगे, यही उनकी पूंजी है। उनकी इच्छा है कि इस बार T20 वर्ल्डकप की ट्रॉफी टीम इंडिया जीतकर लाए।




