Friday, January 9, 2026
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तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क छोटे खुदरा विक्रेताओं के खतरा, सरकार पुनर्मूल्यांकन करे: एफआरएआई

एफआरएआई ने तंबाकू उत्पादों पर करों में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि एक फरवरी से लागू नए उत्पाद शुल्क से छोटे खुदरा विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित होगी। अचानक कीमत बढ़ने से उपभोक्ता अवैध बाजार की ओर मुड़ सकते हैं, जिससे कानूनी खुदरा कारोबार और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

नई दिल्ली। ‘फेडरेशन ऑफ रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एफआरएआई) ने तंबाकू उत्पादों पर कानूनी तौर पर करों में भारी वृद्धि पर बृहस्पतिवार को गंभीर चिंता व्यक्त की और सरकार से छोटे खुदरा विक्रेताओं के हित में पुनर्विचार करने एवं अवैध संचालकों को बाजार पर कब्जा करने से रोकने का आग्रह किया। वित्त मंत्रालय के चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण एवं शुल्क संग्रह) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी करने की पृष्ठभूमि में एफआरएआई ने यह मांग उठाई है। इसके तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 ‘स्टिक’ पर 2,050-8,500 रुपये का उत्पाद शुल्क लगाया गया है जो एक फरवरी से प्रभावी होगा।

एफआरएआई ने बयान में कहा कि इस कदम ने छोटे खुदरा विक्रेताओं, फेरीवालों एवं रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को गंभीर चिंता में डाल दिया है जो अपनी आजीविका के लिए दैनिक उपभोग की वस्तुओं, विशेष रूप से तंबाकू उत्पादों पर निर्भर हैं। एसोसिएशन ने आगाह किया कि नियमित उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में अचानक और तीव्र वृद्धि का भारत के अनौपचारिक खुदरा परिवेश पर असमान प्रभाव पड़ता है जो लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और कम मुनाफे एवं उच्च मात्रा की बिक्री पर संचालित होता है।

एफआरएआई करीब 80 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मझोले खुदरा विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। इसने कहा कि कीमतों में अचानक आई तेजी उपभोक्ताओं को कानूनी बाजारों से दूर कर देगी, आस-पड़ोस की दुकानों में ग्राहकों की संख्या कम कर देगी और अवैध एवं अनियमित विकल्पों की ओर बदलाव को तेज कर देगी। एफआरएआई के संयुक्त सचिव गुलाब चंद खोड़ा ने कहा कि वैध उत्पादों की कीमतों में अचानक वृद्धि से दुकानों में मांग तुरंत खत्म हो जाती है और उपभोक्ता अवैध विकल्पों की ओर धकेल दिए जाते हैं। इससे छोटे दुकानदार घटती आय और अवैध आपूर्तिकर्ताओं के दबाव के बीच फंस जाते हैं।

इस मुद्दे को व्यापक वृहद आर्थिक संदर्भ में रखते हुए एफआरएआई ने कहा कि यह कमद वृद्धि अन्यत्र मूल्य नियंत्रण के लाभों को बेअसर करता है और प्रगतिशील माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती से मिले लाभों के उलट है जिससे उपभोक्ता विश्वास एवं खुदरा स्थिरता कमजोर होती है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह कराधान या सार्वजनिक नीति के उद्देश्यों का विरोध नहीं कर रहा है लेकिन उसने आग्रह किया कि करों को संतुलित, राजस्व-तटस्थ और मूल्य-स्थिर होना चाहिए।

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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