जयपुर। जम्मू कश्मीर के आतंक प्रभावित इलाकों से शकीला अख्तर को तलाशना ‘टेढ़ी खीर’ हो गया है। शकीला तो तब मिले जब वहां की स्थानीय पुलिस यहां से जाने वाली टीम का ठीक ढंग से सहयोग करे। अब CRPF के साथ पैरा मिलिट्री फोर्स (अर्धसैनिक बल) शकीला की तलाश में यहां से जाने वाली पुलिस टीम की मदद करेगी। जोधपुर हाईकोर्ट ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए बरड़वा थाने के SHO महेंद्र सिंह पालावत से 23 फरवरी तक शकीला को पेश करने के लिए कहा।
प्रेमी ने हाईकोर्ट में दाखिल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
सूत्रों के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिए गए। मामला कुचामन-डीडवाना जिले के बरड़वा थाने का है। यह ‘प्रेम विवाह’ की एक ऐसी कहानी है, जिसमें प्रेमी जितेंद्र सिंह ने शकीला (23) को तलाशने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। जितेंद्र सिंह यहां के कुचामन-डीडवाना जिले के सुदरासन का रहने वाला है।
स्थानीय पुलिस ने नहीं की मदद
हाईकोर्ट के आदेश पर बरड़वा थाने से गई पुलिस टीम ने अनंतनाग, पुलवामा, समेत करीब आधा दर्जन जिलों में शकीला को तलाशा। वो तो मिली नहीं, जाने वाले पुलिसकर्मियों की वहां स्थानीय स्तर पर कोई खासी मदद भी नहीं मिली। यह भी सही है कि अनंतनाग, पुलवामा, श्रीनगर, उधमपुर समेत आसपास के इलाकों में आतंकी आए दिन ‘कुछ न कुछ’ करते रहते हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस अफसरों ने इनसे रात में तलाश के लिए जाने से मना किया, जब ज्यादा फोर्स किया गया तो एक-दो पुलिसकर्मी साथ तक भेज दिए। बावजूद इसके सीआई महेंद्र सिंह पालावत ने अपनी टीम के साथ छह-सात दिन शकीला को तलाश किया पर वो हाथ नहीं लगी।
वहां वकील तक ने बोल दिया झूठ
बताया जाता है कि इस भागदौड़ में एक वकील ने टीम को यहां तक कह दिया कि शकीला की तरफ से श्रीनगर में याचिका लगा रखी है हालांकि बाद में इस झूठ का भी पर्दाफाश हो गया। यह भी पता लगा कि शकीला ने दूसरी शादी कर ली, उसके घर वाले उसे छिपाए फिर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह सामने आई कि स्थानीय स्तर पर वहां के लोग भी कुछ भी बताने से कतराते रहे।
क्या है पूरा मामला ?
शकीला अख्तर अनंतनाग अल्सीदार गांव की रहने वाली है। यहां कुचामन-डीडवाना जिले के सुदरासन का रहने वाला जितेंद्र सिंह कुछ समय पहले जम्मू में किसी कंपनी में कार्य करने गया था। इसी दौरान शकीला अख्तर से उसकी नजदीकियां बढ़ीं, बकौल जितेंद्र उसके घर वालों की सहमति से यहां फिरोजपुर में शादी कर लिव इन का सर्टिफिकेट बनवा लिया तो उधर शकीला के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसके दो-तीन दिन बाद सरदार शहर के पास जम्मू पुलिस ने दोनों को धर-दबोचा और वापस वहीं ले गए। यहां शकीला ने उसके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया तो उसे तो रवाना कर दिया गया पर शकीला को उसके साथ नहीं भेजा। कुछ दिनों तक शकीला से उसने मोबाइल पर बातचीत की, फिर यह भी बंद हो गया। अब शकीला के लिए उसने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर दी।
शकीला की तलाश में 3 बार जा चुकी टीम
ऐसा नहीं है कि शकीला की तलाश में कोई कोर-कसर छोड़ी गई। तीन बार यहां से पुलिस टीम वहां जा चुकी है। दिबश भी दी पर उसका कोई पता नहीं चला। उसकी तलाश ढंग से तो तब हो जब वहां से सहयोग मिले पर ऐसा होता ही नहीं। वहां की पुलिस पहले तो जैसे भी हो वो ना-नुकर करती है। दूसरा यहां से जाने वाले पुलिस को आतंकी इलाके में सावधानी बरतने की सलाह देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। केवल यही नहीं जम्मू-कश्मीर से जुड़े अधिकांश मामलों के आरोपियों को पकड़ने के लिए भी जब भी राजस्थान पुलिस गई, सहयोग नहीं मिला। यह बात कई पुलिस अफसर स्वीकार करते हैं।
हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर व चंद्र शेखर शर्मा के समक्ष सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि शकीला जम्मू और कश्मीर राज्य में रह रही है और राजस्थान पुलिस ने जब जम्मू और कश्मीर के अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने उसका पता लगाने में सहयोग नहीं किया। शकीला ने शब्बीर अहमद खान के साथ मिलकर एक रिट याचिका जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में गिरफ्तारी और उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग करते हुए दायर की है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शकीला तो जल्द तलाश कर पेश किया जाए। CRPF-पैरा मिलिट्री फोर्स इसके लिए सहयोग करें।
पुलिस का क्या है कहना ?
बरड़वा थाना सीआई महेंद्र सिंह पालावत का कहना है कि अभी 7 दिन शकीला की तलाश के लिए गए थे। उसके गांव समेत आसपास के इलाकों में सर्च किया पर वो नहीं मिली। जितेंद्र सिंह ने इससे शादी का लिव इन का सर्टिफिकेट बनवाया। हाईकोर्ट में इस बाबत याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि अब सीआरपीएफ व पैरामिलट्री फोर्स का सहयोग मिलेगा।




