प्रतीक चौवे, संपादक
Budget 2026 : जयपुर। अर्थव्यवस्था बढ़ने की तमाम संभावनाओं के बीच पहली बार रविवार को बजट पेश होने जा रहा है। इस बार भी आमजन के पास उम्मीदों की लंबी फेहरिस्त है। सबके अपने-अपने सपने हैं, किसके कितने पूरे होंगे, यह आज पता चल जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। महंगाई से त्रस्त परिवार, नौकरी की तलाश में भटकता युवा, बढ़ती लागत से जूझता किसान ही नहीं और भी बहुत से लोग हैं जो अनिगनत अपेक्षाओं के साथ इस दिन का इंतजार कर रहे हैं।
बहुत कुछ ऐसा भी होगा जो दोहराया जाएगा मसलन विपक्षी बजट को निराशाजनक बताएगा तो सरकारी पक्ष तारीफों के पुल बांधेगा। वैसे बजट के बारे में अधिकांश आम आदमी की समझ बहुत साधारण है। महंगाई से निजात मिल जाए, इसके साथ सरकार के कुछ ‘उपकार’ हो जाएं। अधिकांश की उम्मीदों में करों में राहत, सब्सिडी के बेहतर प्रबंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतें काबू में रखने के ठोस कदम ही इस बजट की खास अपेक्षाएं होती है। मध्यम वर्ग हमेशा से बजट का सबसे बड़ा उम्मीदवार रहा है।
आयकर स्लैब में राहत, शिक्षा और स्वास्थ्य पर टैक्स छूट जैसी मांगें हर साल उठती हैं। यह वर्ग न तो सरकारी योजनाओं का सीधा लाभार्थी होता है और न ही बड़े कॉरपोरेट्स जैसी सुविधाएं पाता है। ऐसे में बजट से उसकी अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं। रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाएं, यात्रा व कनेक्टिविटी, ग्रीन ऊर्जा-सोलर सब्सिडी, किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे के साथ रोजगार और विकास को गति देने का लक्ष्य इसी बजट में तय होता है। बजट से सबको उम्मीद रखना स्वाभाविक है, पर हर किसी का सपना एक साथ पूरा होना संभव नहीं।
बजट से हर घर-वर्ग राहत की उम्मीद करता है। छोटे-छोटे सपने इस बजट से भी जुडे हैं। किसान आय बढ़ने के सपने संजोए बैठा है तो युवा रोजगार के। सबसे बड़ी अपेक्षा महंगाई पर नियंत्रण को लेकर है। खाद्य पदार्थों से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक, आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ बढ़ा है। बजट से उम्मीद की जा रही है कि वह करों में राहत, सब्सिडी के बेहतर प्रबंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतें काबू में रखने के लिए ठोस कदम उठाएगा। अब देखना यह है कि आज इनमें से क्या मिल पाएगा-क्या नहीं।




