वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में गंभीर व्यवधान उत्पन्न किया है, जिसका असर खाद्य कीमतों और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ेगा। तीनों संस्थाओं के प्रमुखों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा भार दुनिया की कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़ी आबादी पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि तेल, गैस और उर्वरक की बढ़ती कीमतें, साथ ही परिवहन में बाधाओं के कारण खाद्य वस्तुओं की लागत में तेज वृद्धि होगी, जिससे खाद्य असुरक्षा और भी गंभीर हो सकती है।
सतर्क निगरानी बनाए रखने का आश्वासन दिया और कहा कि वे संकटग्रस्त लोगों को सहायता देने के लिए उपलब्ध संसाधनों का समन्वय करेंगे। उनका कहना है कि विशेष रूप से कम आय वाले और आयात पर निर्भर देशों में ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी कमजोर घरों पर सबसे अधिक प्रभाव डालेगी, क्योंकि इन सरकारों की वित्तीय क्षमता सीमित है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने यह भी जोर देकर कहा कि वे जीवन और आजीविका की रक्षा, सामाजिक स्थिरता, विकास और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक समर्थन जारी रखेंगे। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था, क्योंकि ईरान ने अपने परमाणु ईंधन भंडार को छोड़ने से इंकार कर दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक खाद्य बाजारों में इस अस्थिरता का असर आने वाले महीनों में और स्पष्ट दिखाई देगा, और कमजोर देशों को सबसे अधिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।



