जयपुर। राजधानी जयपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां यौन शक्ति बढ़ाने के नाम पर ऑनलाइन दवाओं की आड़ में बड़ा धोखाधड़ी नेटवर्क चल रहा था। अगर आप भी ऐसे प्रोडक्ट ऑनलाइन खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए चेतावनी है। यहां जयपुर के गोपालपुरा स्थित भंडारी हॉस्पिटल में सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी और ड्रग आयुक्तालय की टीम ने छापेमारी की। जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल से जुड़े पते का इस्तेमाल कर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाया जा रहा था, जहां “ट्राइमेक्स” नाम से दवाओं का कॉम्बिनेशन बेचा जा रहा था।
खतरनाक कॉम्बिनेशन का खुलासा
जांच में सामने आया कि इस तथाकथित दवा में पैपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल, क्लोरप्रोमाजिन का मिश्रण इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि डॉक्टर मरीज की जरूरत के हिसाब से दवाओं का कॉम्बिनेशन दे सकते हैं, लेकिन इस तरह का कॉम्बिनेशन DCGI की मंजूर सूची में शामिल नहीं है, और इसे ब्रांड बनाकर बेचना पूरी तरह गैरकानूनी है।
फर्जी फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
जांच में यह भी सामने आया कि “जय भवानी फार्मेसी” के नाम का दुरुपयोग किया गया। “ओह-मेन” नाम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संचालित हो रहा था। “OHMAN” नाम से एक फर्जी फार्मेसी बनाई गई थी। इन नामों से बिल भी काटे जा रहे थे, जबकि इनके पास कोई वैध ड्रग लाइसेंस नहीं था। हालांकि अस्पताल ने खुद को पाक साफ साबित करने के लिए कार्रवाई से ठीक पहले ही FIR दर्ज करा दी ताकि अस्पताल संचालक पर कोई आंच ना आए। इस कार्रवाई से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने अपने ही कर्मचारी मनीष कुमार सोनी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया था। बताया जा रहा है कि आरोपी पिछले 5 साल से डॉक्टर के असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहा था और उसी ने यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी देर तक कैसे चलता रहा खेल? सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और अस्पताल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
आगे क्या होगा?
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार मामले से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि इस गंभीर मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और कितने लोग इसकी जद में आते हैं। बहरहाल डॉ चिराग भंडारी की भूमिका इसमें संदिग्ध है। वो पाक साफ नहीं हैं। ड्रंग डिपार्टमेंट को उनकी भूमिका संदिग्ध लग रही है। क्योंकि यह सारा गोरखधंधा उनकी मिलीभगत के बिना कैसे संभव हो सकता है, यह सबसे बड़ा सवाल है।
सावधान रहें: बिना डॉक्टर की सलाह के ऑनलाइन “पावर बढ़ाने” वाली दवाएं खरीदना आपके स्वास्थ्य और जेब दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
विवादों से नाता पुराना, भंडारी हो चुके हैं ट्रेप
सात साल पहले जयपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में गिरफ्तार किए जा चुके डॉ. चिराग भंडारी का विवादों से पुराना नाता रहा है। 7 साल पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जयपुर शहर द्वितीय टीम ने गोपालपुरा बाईपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल में कार्रवाई की थी। टीम ने डॉक्टर चिराग भंडारी को उनके ही चैंबर में 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। तत्कालीन एसीबी के एएसपी देशराज यादव ने बताया था कि, डॉ. चिराग भंडारी अद्वैत वेदांत इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर थे। उनके खिलाफ गिर्राज और सूरजकरण मीणा नाम के दो छात्रों ने शिकायत दर्ज करवाई थी। दोनों छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी स्कॉलरशिप का फॉर्म आगे बढ़ाने के लिए डॉक्टर भंडारी उनसे मिलने वाली छात्रवृत्ति का 50 प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन किया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी टीम ने सुनियोजित तरीके से ट्रैप की योजना बनाई। भंडारी हॉस्पिटल की तीसरी मंजिल पर स्थित चैंबर में जैसे ही पीड़ित छात्रों ने तय रकम दी, टीम ने मौके पर ही डॉक्टर को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद से पूरे मामले में हड़कंप मच गया था।

7 साल पहले की एक तस्वीर।



