Friday, April 3, 2026
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कौन हैं जज अमित मेहता? जिनके फैसले से ट्रंप फिर चर्चा में

वाशिंगटन। भारतीय मूल के अमेरिकी न्यायाधीश अमित मेहता एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिंसा से पहले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिया गया भाषण राष्ट्रपति को मिलने वाली संवैधानिक छूट के दायरे में नहीं आता। कोलंबिया जिले की संघीय अदालत में दिए गए इस फैसले में जज मेहता ने कहा कि व्हाइट हाउस के पास स्थित ‘द एलिप्स’ में दिया गया ट्रंप का भाषण राजनीतिक प्रकृति का था।

इसलिए इसे राष्ट्रपति के आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ा नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी उन मुकदमों के संदर्भ में आई है, जिन्हें पुलिस अधिकारियों और डेमोक्रेट सांसदों ने दायर किया था। जज मेहता ने अपने फैसले में 2 जनवरी 2021 को ट्रंप द्वारा जॉर्जिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ब्रैड रैफेंसपर्गर को किए गए फोन कॉल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह अनुरोध—11,780 वोट “ढूंढने” की बात—एक राजनीतिक कोशिश थी, न कि किसी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा।

हालांकि अदालत ने यह भी माना कि ट्रंप के कुछ कार्य आधिकारिक दायरे में आ सकते हैं। जैसे न्याय विभाग के अधिकारियों को दिए गए निर्देश और दंगे के दौरान तैयार कुछ सोशल मीडिया संदेश ऐसे कदम हैं, जिन्हें कानूनी छूट मिल सकती है और उन्हें मुकदमे में सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। गुजरात के पाटन में जन्मे जज मेहता को 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नियुक्त किया था। इससे पहले भी वे अहम फैसलों के कारण चर्चा में रहे हैं, जिनमें गूगल के खिलाफ एंटी-ट्रस्ट कानून उल्लंघन का निर्णय शामिल है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला अंतिम नहीं है और ट्रंप को अपने बचाव में आधिकारिक छूट का मुद्दा फिर उठाने का अधिकार रहेगा। इसके बावजूद, यह निर्णय अमेरिकी न्याय प्रणाली में राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाओं को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।

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